हरियाणा में जैविक खेती को बढ़ावाहरियाणा सरकार ने किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ाने के लिए एक बड़ी योजना शुरू की है. इस योजना के तहत जो किसान केमिकल खाद और कीटनाशकों को छोड़कर जैविक खेती अपनाएंगे, उन्हें अगले पांच साल तक हर साल प्रति एकड़ 10,000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी. राज्य के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, मिट्टी की सेहत सुधारना और रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग को कम करना है. उन्होंने कहा कि सरकार खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है.
राणा ने बताया कि आजकल लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं और जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में अगर किसान जैविक खेती अपनाते हैं तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर दाम मिल सकता है.
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपनी फसल का सर्टिफिकेशन कराना होगा. यह सर्टिफिकेशन एपीडा (APEDA) से कराना अनिवार्य रहेगा, ताकि उत्पाद की क्वालिटी और विश्वसनीयता बनी रहे.
सरकार राज्य में कृषि विभाग की करीब 800 एकड़ जमीन को भी इस योजना के तहत इस्तेमाल करेगी. यह जमीन उन किसानों को पट्टे पर दी जाएगी जो कम से कम 10 साल तक जैविक खेती करने के लिए तैयार होंगे. इससे लंबे समय में जैविक खेती का मजबूत आधार तैयार होगा.
किसानों को सर्टिफिकेशन में परेशानी न हो, इसके लिए सरकार राज्य स्तर पर ही व्यवस्था कर रही है. हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को जैविक खेती के सर्टिफिकेशन के लिए अधिकृत किया जाएगा. इससे किसानों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. समय और खर्च दोनों की बचत होगी.
राज्य के कई जिलों—जैसे पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल—में जैविक उत्पाद बेचने वाले किसानों के लिए मंडियों में अलग स्थान दिया जाएगा. इन मंडियों में फसलों की जांच के लिए आधुनिक प्रयोगशालाएं भी बनाई जाएंगी, ताकि क्वालिटी की तुरंत जांच हो सके.
सरकार का कहना है कि जब ये लैब और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पूरी तरह शुरू हो जाएगी, तो हरियाणा के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान मिलेगी. इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
सरकार की यह योजना कई स्तरों पर काम करेगी. इससे किसानों की कमाई बढ़ेगी, मिट्टी की उर्वरता सुधरेगी, रसायनों का इस्तेमाल घटेगा, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और लोगों को बेहतर और सुरक्षित खाद्य पदार्थ मिलेंगे. कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार की यह पहल खेती को ज्यादा टिकाऊ और लाभदायक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है.
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