कम बारिश में अरहर की खेती करने की सलाहदेश सहित बिहार में मॉनसून की बारिश जारी है. हालांकि, बिहार में मॉनसून की बारिश को लेकर जिस तरह से आसमान में बादलों की आवाजाही जारी है, उसके अनुपात में बारिश का ग्राफ काफी कम है. जुलाई के इस महीने में किसानों के खेतों में धान की नर्सरी लगभग तैयार हो चुकी है. अब उनकी नजर बेहतर बारिश के लिए आसमान की ओर है, ताकि वे समय पर धान की खेती का काम शुरू कर सकें. लेकिन धान के अलावा खरीफ सीजन के दौरान अन्य फसलों की खेती के लिए भी यह समय उपयुक्त है. इनमें खरीफ प्याज की नर्सरी, मक्का, तिल और अरहर की खेती शामिल है. इसे लेकर डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के वैज्ञानिक किसानों को महत्वपूर्ण सलाह दे रहे हैं.
डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के वैज्ञानिकों का कहना है कि खरीफ सीजन में जिन स्थानों पर पानी की कमी है और जहां धान की खेती करना संभव नहीं है. ऐसे ऊंचे इलाकों में किसान मध्य जुलाई तक तिल की बुवाई कर सकते हैं. वहीं, बुवाई से पहले किसान बीजों को थीरम 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें और 30×10–15 सेंटीमीटर की दूरी पर बुवाई करें.
जुलाई के महीने में जहां धान की रोपनी धीरे-धीरे शुरू हो जाती है, वहीं इस महीने में जो किसान धान की खेती नहीं करना चाहते हैं, वे मक्का और अरहर की खेती कर सकते हैं. मक्का के लिए किसान शक्तिमान-2, शक्तिमान-5, शक्तिमान-6 और राजेंद्र संकर मक्का-3 का चयन बीज के रूप में कर सकते हैं. वहीं अरहर के लिए पूसा-9, बहार और राजेंद्र अरहर-2 किस्म के बीज का चयन कर सकते हैं.
बिहार की राजधानी पटना समेत राज्य के कई जिलों में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है. बीते दो दिनों के दौरान राजधानी पटना में आसमान बादलों से घिरा रहा. वहीं, शाम होते-होते शहर सहित जिले के अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई. आज सुबह से ही गया जिले में भी बारिश का दौर जारी है. हालांकि, किसानों का कहना है कि इस बारिश से धान की खेती शुरू करना संभव नहीं है.
मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में अगले चार दिनों के दौरान अनेक स्थानों पर अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन होने की संभावना नहीं है. वहीं, इस अवधि में न्यूनतम तापमान में भी किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं. यानी राज्य में भले ही मौसम का मिजाज बदलता हुआ दिख रहा हो, लेकिन अच्छी बारिश की उम्मीदें अभी भी दूर नजर आ रही हैं.
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