पशुओं को खाने में सरसों या मूंगफली की खली देना भी काफी अच्छा है. (Photo-Kisan Tak)Dairy Farmers: देश में पशुपालन पुराने समय से ही किया जा रहा है, लेकिन बीते कुछ सालों से पशुपालन लाभ का एक बेहतर व्यावसाय बन गया है. बरसात के मौसम में पशुओं से दुग्ध उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, यह सबसे बड़ी समस्या किसानों के सामने आ जाती है. इस मामले में इंडिया टूडे के किसान तक ने रायबरेली के पशु विशेषज्ञ डॉ. इंद्रजीत वर्मा से बातचीत की. डॉ. वर्मा ने बताया कि कमाई के लिहाज से अच्छी नस्ल की दुधारू पशु से डेयरी फार्मिंग करना बेहद फायदे का सौदा है. लेकिन बरसात के सीजन में पशुओं में दूध उत्पादन करने की क्षमता थोड़ी कम हो जाती है. जिसका मुख्य कारण मौसम में बदलाव होना होता है. उन्होंने बताया कि पशुओं में हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं. जिससे कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिनमे प्रमुख रूप से पशुओं के थानों में संक्रमण, परजीवी संक्रमण शामिल है.
लेकिन घरेलू तरीके से गाय-भैंस में दूध के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है. डॉ. इंद्रजीत वर्मा ने आगे बताया कि पशुओं को सिर्फ हरा चारा खिलाने से दूध उत्पादन नहीं बढेगा, इसलिए हरे चारे या सूखे चारे के साथ मिनरल और कैल्शियम की भी साथ में देना चाहिए. इसके साथ प्रो पाउडर, मिल्क बूस्टर, मिल्कगेन आदि पशुओं को चारे के साथ खिलाया जा सकता हैं.
उन्होंने बताया कि पशुओं को आहार खिलाने से पहले कम से कम 4 से 5 घंटे के लिये दाने को भिगो देना चाहिए, ताकि पशुओं को आहार पचाने में कोई परेशानी ना हो. पशुओं को साधारण हरा चारा ना खिलाएं, बल्कि नेपियर घास, अल्फा, बरसीम, लोबिया, मक्का की उन्नत किस्मों का चारा भी खिलाते रहें. वहीं अच्छे फैट वाले दूध के लिए पशु आहार में कैल्शियम, मिनरल मिक्सचर, नमक, प्रोटीन, वसा, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट की देते रहें. पशुओं को खाने में सरसों या मूंगफली की खली देना भी काफी अच्छा है. इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और दूध देने की क्षमता भी बढ़ती है.
डॉ. वर्मा के मुताबिक, गिर नस्ल की गाय और मुर्रा नस्ल की भैंस का पालन आज डेयरी फार्मर्स कर रहे हैं. क्योंकि गिर नस्ल की गायें दिन में 15 लीटर तक दूध दे सकती हैं. पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत वर्मा बताते हैं कि मुर्रा नस्ल की भैंस अन्य भैंसों की तुलना में काफी अलग होती है. इसे दुनिया की सबसे दुधारू नस्ल की भैंस कहा जाता है. मुर्रा नस्ल की भैंस 1 दिन में लगभग 22 से 25 लीटर तक दूध देती है. इसीलिए इसे बेहद अधिक दुग्ध उत्पादन वाली भैंस माना जाता है, जो एक साल में लगभग 2800 से 3000 हजार लीटर तक का दुग्ध उत्पादन देती हैं. यही कारण है कि इसे काला सोना भी कहा जाता है.
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