पशुओं की पसंद हैं ये दो चारे, जानिए क्या है इनकी खासियत और खेती का तौर तरीका 

पशुओं की पसंद हैं ये दो चारे, जानिए क्या है इनकी खासियत और खेती का तौर तरीका 

बरसीम रबी सीजन में उगाई जाने वाली चारा की प्रमुख फसल है. इससे चार से छह कटाईयां प्राप्त की जा सकती हैं. बरसीम से लम्बे समय तक चारा मिलता है तथा यह प्रोटीन से भरपूर होती है. प्रति एकड़ 360 से 400 क्विंटल हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है. जबकि जई रबी का मुख्य अनाजीय चारा है. जानिए इन दोनों की खेती के बारे में. 

Advertisement
पशुओं की पसंद हैं ये दो चारे, जानिए क्या है इनकी खासियत और खेती का तौर तरीका बरसीम की फसल को पशुओ के लिए हरे चारे के रूप में उगाया जाता है

देश में पशुओं के चारे की समस्या गहराती जा रही है. हरे और सूखे दोनों चारे की कमी है, इसीलिए पशुपालकों को ज्यादा दाम पर इसे खरीदना पड़ रहा है. महाराष्ट्र में तो बार-बार पशुपालन करने वाले किसान चारे की महंगाई की वजह से ही दूध का दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि दुधारू पशुओं को वर्ष भर हरा चारा खिलाना आर्थिक रूप से सबसे सस्ता विकल्प है. मॉनसून से पहले (मई-जून) तथा मॉनसून के बाद में मतलब नवम्बर-दिसम्बर में हरे चारे की बहुत कमी होती है, जबकि मॉनसून मौसम (जुलाई-अगस्त) एवं जाड़े (फरवरी से अप्रैल माह) में हरे चारे की अधिकता होती है. इसलिए दूध उत्पादन को स्थिर रखने के लिए वर्ष भर हरा चारा उत्पादन करना ही एक टिकाऊ माध्यम है.

इसके लिए पशुपालक गर्मी तथा बारिश के मौसम में ज्वार, बाजरा, मक्का, एमपी चरी, सूडान, संकर लोबिया तथा सर्दी में बरसीम, जई, सरसों, गाजर, शलजम, चाइनीज कैबेज आदि उगा सकते हैं. आवश्यकता अनुसार छोटे-छोटे क्षेत्रफल में 1-1 माह के अंतराल पर बुआई करने से वर्ष भर हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है. दलहनी तथा गैर-दलहनी चारा मिलाकर भी उगाया जा सकता है. जानिए इनमें से हरे चारे की दो फसलों के बारे में. 

बरसीम की फसल

यह रबी सीजन में उगाई जाने वाली चारा की प्रमुख फसल है. इससे चार से छह कटाईयां प्राप्त की जा सकती हैं. बरसीम से लम्बे समय तक चारा मिलता है तथा यह प्रोटीन से भरपूर होती है.

ये भी पढ़ेंः किसानों को कपास के भाव में तेजी की उम्मीद, रोक कर रखा माल, जानें आज का भाव

भूमि की तैयारी एवं बुवाई

खेत को समतल बनाकर 3-4 जुताइयों के बाद मिट्टी अच्छी तरह तैयार करें. खेत में पानी भरकर, 1-1.5 से.मी. खड़े पानी में बीज का छिड़काव करें.
खाद एवं उर्वरक गोबर की खाद 8-10 टन, नाइट्रोजन 8 कि.ग्रा. (यूरिया 18 कि.ग्रा.), फास्फेट 32 कि.ग्रा. (सिंगल सुपर फास्फेट 200 कि.ग्रा.) प्रति एकड़ डाले. 
इसकी उन्नत प्रजातियां वरदान, बुन्देल बरसीम 2 तथा 3, बीएल-10, मस्कावी. बीज दर 10 से 12 कि.ग्रा. प्रति एकड़ डालें. बीज को राइजोबियम कल्चर द्वारा उपचारित कर बुआई करने से पैदावार अधिक होगी. 

सिंचाई कितनी होगी

सिंचाई भूमि की किस्म एवं मौसम की स्थिति के अनुसार करना चाहिए. पहली हल्की सिंचाई एक सप्ताह बाद करें. इसके बाद 15 से 20 दिन के अंतर पर पानी देना चाहिए. कुल 15 से 16 सिंचाईयों की आवश्यकता पड़ती है. बोने के 40 दिन बाद पहली कटाई, इसके बाद प्रत्येक 30 दिन के बाद कटाई करें.

चारे के लिए जई की फसल

जई रबी का मुख्य अनाजीय चारा है. इसकी खेती हमारे यहां सफलतापूर्वक की जा सकती है. अच्छी प्रकार जुताई करके तैयार भूमि में हल के पीछे, लाइन से लाइन की दूरी 20-25 से.मी. पर बुवाई करें. इसकी उन्नत किस्में जे.एच.ओ. 851, 822, 99-2, 2004, 90-1, केन्ट हैं. 
बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी का होना अत्यन्त आवश्यक है. इससे जमाव अच्छा होता है. पहली सिंचाई, बुवाई के 21 दिन पर, दूसरी 45 दिन, तीसरी 60 दिन तथा चौथी 80 दिन पर करनी चाहिए.
पहली कटाई 55 दिन पर, फ़िर दूसरी कटाई 35 से 40 दिन बाद. अधिक कटाई के लिए बाल बनने की अवस्था के पहले काट लेना चाहिए. इसमें 160 -240 क्विंटल प्रति एकड़ हरा चारा मिल जाएगा.

ये भी पढ़ें: Onion Price: किसान ने 443 किलो प्याज बेचा, 565 रुपये घर से लगाने पड़े, न‍िर्यात बंदी ने क‍िया बेहाल 

 

POST A COMMENT