egg production in saharanpurबहुत सारे पोल्ट्री फार्मर ये तय मान लेते हैं कि गर्मियां आ गई हैं तो अब अंडे-चिकन के उत्पादन पर असर तो पड़ेगा ही पड़ेगा. कुछ वक्त पहले की बात करें तो उनका ऐसा सोचना गलत भी नहीं था. लेकिन अब पोल्ट्री फार्म में जिस तरह की टेक्नोलॉजी आ गई है तो उसके बाद इस तरह की बातें बेमानी हो जाती हैं. पोल्ट्री एक्सपर्ट की मानें तो अंडे देने वाली मुर्गी हो या फिर चिकन के लिए पाले जाने वाले मुर्गे, मौसम के हिसाब से इनके दाने-पानी का ख्याल रखना बहुत जरूरी है. क्योंकि पीने के पानी में अगर जरा सी भी कोई कमी हुई तो फिर मुर्गी का अंडे देना बंद हो जाएगा.
वहीं मुर्गे की ग्रोथ भी अच्छी तरह से नहीं हो पाएगी.पानी में आंखों से ना दिखाई देने वाले जीवाणु-कीटाणु आने का जो माध्यम है उसमे तालाब, नदियां, खुले कुएं, पब्लिक वॉटर सप्लाई सिस्टम, स्टोर कर ट्रांसपोर्ट करने के दौरान और ओवरहेड टैंक आदि होते हैं. इसलिए मानकों पर खरे उतरने वाले पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए. पोल्ट्री फार्म खोलने के नियम में भी पानी के बारे में साफ हिदायत दी गई है.
डिहाईड्रेशन और गर्मी के असर को कम करने के लिए पोल्ट्री फार्म में ताजा और ठंडा पीने का पानी बहुत जरूरी है. पानी की क्वालिटी को बेहतर बनाए रखने और उसकी जांच करने करने वाले उपकरण लगवाएं. पानी का छिड़काव भी करवा सकते हैं.
पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि पोल्ट्री फार्म में जरूरी तापमान और हवा बनाए रखने के लिए ये जरूरी है कि फार्म में खिड़की-दरवाजों का सिस्टम ठीक हो. एग्जास्ट फैन लगाए गए हों. फार्म की बाहरी दीवारों पर गीली बोरी का इस्तेमाल किया जा सकता है.
गर्मी के मौसम में ये बहुत ही जरूरी है कि मुर्गे-मुर्गियों की पोषक तत्वों की जरूरत को पूरा किया जाए. दिन के फीड को इस तरह से तैयार किया जाए वो मुर्गियों में हीट स्ट्रै्स को कम करने वाला हो. दिन के वक्त इलेक्ट्रोलाइट की खुराक मुर्गे-मुर्गियों को डिहाईड्रेशन से बचाती है.
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