Animal Care in Monsoon: बरसात में गाय-भैंस का दूध निकाल रहे हैं तो करें ये काम, नहीं होगी बीमारी

Animal Care in Monsoon: बरसात में गाय-भैंस का दूध निकाल रहे हैं तो करें ये काम, नहीं होगी बीमारी

Animal Care in Monsoon बरसात और बाढ़ के दौरान दूध देने वाले पशु कई तरह की बीमारी और संक्रमण के शि‍कार हो जाते हैं. जिसका सीधा असर पशुओं के उत्पादन और उसकी लागत पर पड़ता है. एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि इन दिनों में पशुओं साफ-सफाई और देखभाल बहुत अच्छे से होनी चाहिए. लापरवाही ही बीमारी की बड़ी वजह बनती है.  

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Animal Care in Monsoon: बरसात में गाय-भैंस का दूध निकाल रहे हैं तो करें ये काम, नहीं होगी बीमारीमहाराष्ट्र में दूध की नई कीमतें 11 अगस्त से लागू होंगी (सांकेतिक तस्वीर)

बारिश के दौरान गाय-भैंस को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. यहां तक की संक्रमण भी हो जाता है. अगर एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह होती है गाय-भैंस का दूध निकालना. क्योंकि बरसात के दौरान जब पशुपालक बिना साफ-सफाई का ख्याल रखे दूध निकालते हैं तो पशु संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं. और जैसे ही पशुपालक दूध निकालने में लापरवाही बरतते हैं तो पशुओं को थन समेत कई तरह की बीमारी हो जाती है. थनों में सूजन आने के साथ ही उसमे जख्म तक हो जाते हैं. जिसके चलते गाय-भैंस का दूध तक दूषि‍त हो जाता है. एक्सपर्ट इस दौरान के दूध को इस्तेमाल न करने की सलाह देते हैं.  

एक्सपर्ट का कहना है कि बरसात के दिनों में इस तरह की बीमारी की सबसे बड़ी वजह डेयरी मैनेजमेंट है. जब मैनेजमेंट के दौरान पशुओं की देखभाल में कुछ बातों की अनदेखी की जाती है तो दूध देने वाला पशु संक्रमण का शि‍कार हो जाता है. इसलिए जरूरी है कि पशु का दूध दुहाने से पहले और बाद में साफ-सफाई से जुड़ी कुछ बातों का ख्याल रखा जाए.  

इसलिए आती हैं संक्रमण की चपेट में 

  • दूध निकालने से पहले थनों की सफाई ना करना. 
  • दूध निकालने वाले के कपड़े और हाथों के गंदा होने पर. 
  • दूध निकालने वाला अगर बीमार है. 
  • जिस बर्तन में दूध निकाला जा रहा उसका साफ ना होना. 
  • गंदी जगह पर बैठकर पशु का दूध निकालना. 
  • गाय-भैंस के बच्चे को दूध पिलाने के बाद थनों को ना धोना. 
  • पशु के पेट, थन और पूंछ पर चिपकी गंदगी से.

दूध निकालते में बरतें ये सावधानी 

  • दूध दुहते समय पानी, बर्तन और फर्श की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट रहें. 
  • डेयरी में काम करने वाली लेबर के गंदा रहने और उनके गंदे कपड़े बीमारी को बढ़ा देते हैं. 
  • खराब खान-पान और तनाव पशुओं में थनैला से लड़ने की क्षमता को कमजोर करते हैं.
  • लुवास के वाइस चांसलर (वीसी) के मुताबिक थनैला बीमारी की पहचान दूध से की जा सकती है. 
  • दूध में मौजूद अल्फा1 ग्लाइको प्रोटीन की जांच से थनैला के बारे में वक्त रहते पता लग जाएगा. 
  • इसके लिए दूध के नमूने को स्फेक्ट्रो फोटो मीटर की मदद से जांचा जाता है. 
  • अगर पशु थनैला बीमारी से पीडि़त है तो दूध में मौजूद अल्फा1 ग्लाइको प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाएगी. 

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