Sheep-Goat Pox: भेड़ और बकरियों को चेचक से बचाने के ये हैं उपाय, पढ़ें 23 पॉइंट में Sheep-Goat Pox: भेड़ और बकरियों को चेचक से बचाने के ये हैं उपाय, पढ़ें 23 पॉइंट में
डॉ. के. गुरुराज ने बताया कि चेचक का सबसे बड़ा उपाय तो यही है कि हम प्लान के मुताबिक बकरियों को प्लेग और चेचक के टीके लगवाते रहें. क्योंकि टीके लगवाने का खर्च बहुत ही मामूली होता है और सरकारी केन्द्रों पर तो यह फ्री में ही लग जाते हैं. वहीं अगर यह बीमारी बकरियों को लग जाए तो इलाज में काफी पैसा खर्च हो जाता है.
खुले मैदान में चरतीं भेड़. फोटो क्रेडिट-किसान तकनासिर हुसैन - NEW DELHI,
- Sep 09, 2024,
- Updated Sep 09, 2024, 4:37 PM IST
पशु छोटा हो या बड़ा, अगर उसे कोई बीमारी हो जाए तो उसका सबसे सीधा और पहला असर पड़ता है उसके उत्पादन पर. उत्पादन दूध भी हो सकता है और मीट भी. जिसके चलते पशुपालक को नुकसान उठाना पड़ता है. भेड़-बकरियों की ऐसी ही एक बीमारी है चेचक. ये बीमारी पशु की सेहत और उसके उत्पादन पर तो असर डालती ही है, साथ ही जरा सी भी लापरवाही होने पर पशु की जान तक चली जाती है. लेकिन एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि अगर आप अपने पशुओं की लगातार निगरानी करते हैं तो चेचक के लक्षण पहचान कर उसका वक्त रहते इलाज शुरू कर सकते हैं.
साथ ही बिना कोई जोखिम उठाय पशु को टीका लगवाकर भी चेचक की रोकथाम की जा सकती है. क्योंकि भेड़-बकरी पालन में मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा इसी बात पर तय होता है कि आप उन्हें बीमारी से कितना बचाते हैं. उनकी मृत्यु दर को कितना कम करते हैं. क्योंकि फीड-फोडर के बाद सबसे ज्यादा खर्च दवाईयों पर ही होता है.
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भेड़-बकरी में होने वाली चेचक बीमारी से जुड़ी खास बातें
- भेड़-बकरियों में होने वाली चेचक वायरल बीमारी है.
- इसके चलते भेड़-बकरियों के शरीर और श्लेष्मा झिल्ली पर घाव हो जाते हैं.
- भेड़-बकरियों की सभी नस्ल, उम्र और लिंग में चेचक हो सकती है.
- बकरियां भेड़ के और भेड़ बकरियों के चेचक विषाणु से संक्रमित हो सकती हैं.
- शरीर पर बने घाव की वजह से एरोसोल, लार, मल, बीमार पशुओं की नाक से निकलने वाला स्राव इस बीमारी को फैलाता है.
- भेड़-बकरियों की चेचक का वायरस छह महीने तक जिंदा रहता है.
- चेचक का वायरस 2 घंटे के लिए 56 डिग्री सेल्सि यस और 30 मिनट के लिए 65 डिग्री सेल्सि यस तापमान पर एक्टिव होता है.
- चेचक का संक्रमण तभी फैलता है जब आप पशु के सीधे संपर्क में हों.
- कूड़ा-करकट, चारा, पानी और पशुपालक के यंत्रों से चेचक फैल सकती है.
- भेड़-बकरी के शरीर में वायरस घाव और खरोंच के माध्यम से प्रवेश कर सकता है.
- वायरस त्वचा के दाने में मौजूद हो सकता है. क्योंकि जब प्रभावित जानवर अपने शरीर को दूसरे जानवरों पर रगड़ते हैं, तो वायरस सीधे संवेदनशील जानवरों में पहुंच जाता है.
- कुत्ते-बिल्ली भी चेचक के वायरस को फैला सकते हैं.
- चेचक का वायरस संक्रमित मां से प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण में पहुंच सकता है.
- शरीर पर चेचक के दाने बुखार आने के दो से पांच दिन बाद दिखाई देते हैं.
- चेचक के दाने सबसे पहले त्वचा के बाल रहित भाग पर दिखाई देते हैं.
- चेचक में पलकें सूज जाती हैं और आंख को पूरी तरह ढक देती हैं.
- चेचक में आंख-नाक से म्यूकोप्यूरुलेंट स्राव निकलना शुरू हो जाता है.
- पशु कमजोर, भ्रमित हो जाते हैं और अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पाते हैं.
- ब्रोन्को-न्यूमोनिया के चलते सांस लेने में परेशानी होती है और पशु मर जाते हैं.
- संक्रमित झुंड और बीमार पशुओं को ठीक होने के बाद कम से कम 45 दिनों तक अलग रखना.
- चेचक फैलने से रोकने के लिए ईथर 20 फीसद, क्लोरोफॉर्म और फॉर्मेलिन एक फीसद, फिनोल दो फीसद का इस्तेमाल करें.
- बीमार पशुओं को झुंड से 45 दिन के लिए अलग रखें.
- पशु की मौत हो जाए तो शव और उससे जुड़ी चीजों का निपटान कर दें.
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