Poultry:‘पोल्ट्री को बढ़ावा और अंडे-चिकन की आए दिन बंदी, माननीय ये साथ नहीं चल पाएगा’ Poultry:‘पोल्ट्री को बढ़ावा और अंडे-चिकन की आए दिन बंदी, माननीय ये साथ नहीं चल पाएगा’
Poultry मीट बंदी का आदेश आते ही शहरभर में दुकानें बंद करा दी जाती हैं. कई बार तो स्थानीय स्तर पर नगर निगम या दूसरे विभाग बंदी का आदेश जारी कर देते हैं. कुछ संगठन भी दुकानें बंद कराने के लिए सड़कों पर उतर आते हैं. आयोजन शहर के किसी एक कोने में होता है, लेकिन दुकान शहर से लेकर गांव तक में बंद करा दी जाती हैं.
नासिर हुसैन - New Delhi,
- May 21, 2026,
- Updated May 21, 2026, 3:42 PM IST
‘केन्द्र सरकार समेत हर राज्य सरकार पोल्ट्री को बढ़ावा देती है. इससे राज्य में रोजगार के मौके भी बढ़ते हैं और अंडे-चिकन की डिमांड भी पूरी हो जाती है. इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकारें लोन पर सब्सि डी देती हैं. युवाओं को पोल्ट्री की ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता भी दी जाती है. ये सरकारों का एक अच्छा कदम है. लेकिन इसके साथ ही खासतौर से कुछ राज्यों में मीट बंदी लागू हो जाती है. कभी एक दिन के लिए तो कभी पूरे एक महीने यानि 30 दिन के लिए. ऐसे में अंडा-चिकन पोल्ट्री फार्म पर रखे रह जाते हैं और उनकी बिक्री नहीं हो पाती है. जब 30 दिन प्रोडक्ट नहीं बिकेगा तो बैंक की किस्त कैसे निकलेगी.
मजबूरी में पोल्ट्री फार्मर डिफाल्टर घोषित हो जाते या पोल्ट्री फार्म पर ताला लग जाता है. माननीय ये ऐसे तो नहीं चल पाएगा.’ ये कहना है पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया (PFI) के प्रेसिडेंट रनपाल ढांढा का. उनका कहना है कि जल्द ही पीएफआई का प्रतिनिधि मंडल पीएम, केन्द्रीय पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री और वाणिज्य मंत्री से मिलेगा. उनसे मांग की जाएगी कि मीट और पोल्ट्री प्रोडक्ट की बिक्री का कैलेंडर बनाया जाए. जिससे कारोबार करने में कोई परेशानी न हो.
कारोबारी संग सरकार भी नुकसान में
रनपाल ढांढा ने किसान तक को बताया कि किसी भी त्यौहार और धार्मिक आयोजन के मौके पर स्थानीय पुलिस-प्रशासन का आदेश आते ही शहरभर की मीट-चिकन की दुकानें बंद करा दी जाती हैं. जिसके चलते करोड़ों रुपये का कारोबार एक झटके में थम जाता है. दिहाड़ी लेबर से लेकर कारोबारी तक को नुकसान उठाना पड़ता है. सरकार को भी रेवेन्यू का नुकसान उठाना पड़ता है. कई जगह तो मीट की चपेट में अंडा भी आ जाता है. इसी के चलते हम लोग जल्द ही पीएम नरेन्द्र मोदी, मंत्री डॉ. एसपी सिंह बघेल और पीयूष गोयल से मिलने जा रहे हैं.
दुकान बंद के आदेश का असर
- लोकल बाजार में चिकन-मटन बेचने की दुकान बंद हो जाती है.
- बंदी के चलते रिटेलर मुर्गा खरीदने थोक बाजार नहीं जाते हैं.
- थोक बाजार में मुर्गे की बिक्री नहीं होती है तो फार्म से भी नहीं आता है.
- 30-35 दिन में तैयार होने वाला मुर्गा बंदी के चलते ओवर वेट होने लगता है.
- मुर्गा रुकने के चलते फीड की लागत बढ़ने लगती है.
- ओवर वेट होने के चलते मुर्गे की क्वालिटी और रेट दोनों ही कम हो जाते हैं.
- मंडी-रिटेल दुकान पर बंदी वाले दिन दिहाड़ी मजदूर को मजदूरी नहीं मिलती है.
PFI ने केन्द्र सरकार से क्या मांग की है
- केन्द्र सरकार राज्यों को मीट बिक्री का कैलेंडर बनाने की एडवाइजरी जारी करे.
- किस त्यौहार और धार्मिक आयोजन पर मीट की बिक्री नहीं होगी उसका कैलेंडर बनाया जाए.
- मीट की दुकान बंदी की सूचना तीन महीने पहले दी जाए.
- ऐसे शहर और स्थानों की पहचान की जाए जहां आयोजन होते हैं.
- शहर और स्थान चिन्हिकत कर सार्वजनिक सूचना दी जाए जहां बंदी रहेगी.
- फैसला लेने वाली कमेटी में पीएफआई का एक सदस्य शामिल किया जाए.
- कांवड़ यात्रा के रूट पर ही मीट बिक्री बैन की जाए, न की पूरे शहर या प्रदेश में.
- सावन में पूजा के दिन सिर्फ मंदिरों के आसपास बिक्री बैन की जाए.
- जिस रूट से जुलूस निकलना है सिर्फ वहीं बिक्री बैन की जाए.
PFI ने उठाए ये पॉइंट
- मुर्गी पालन में तय वक्त के बाद बर्ड जल्द खराब होने लगती हैं.
- बंदी से दिहाड़ी मज़दूर, ट्रांसपोर्टर, होलसेल-रिटेल दुकानों के कर्मचारियों को नुकसान होता है.
- हैचरी और सोयाबीन-मक्का के फीड प्लांट को नुकसान उठाना पड़ता है.
- कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट को नुकसान उठाना पड़ता है.
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