इस गौशाला में गायों की कुंडली बनाई जाती हैDry Animals विश्व के सभी देशों के मुकाबले भारत में दुधारू पशुओं की संख्या ज्यादा है. इसी के चलते हम विश्व में दूध उत्पादन में नंबर वन हैं. एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक देश में दुधारू पशुओं की संख्या करीब 30 करोड़ है, लेकिन इसमे से करीब 10 करोड़ ही दूध देते हैं. 20 करोड़ पशु किसी न किसी वजह से दूध देने लायक नहीं है. लेकिन ऐसे 20 करोड़ पशुओं के लिए एक खुशखबरी है. दो सरकारी संस्थान की रिसर्च के बाद से ऐसे पशु अब बच्चा देने में अपना योगदान देंगे. ओवम पिक अप (OPU) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक की मदद से ऐसे पशुओं को मां बनाया जा रहा है. इस तकनीक की मदद से भ्रूण को लैब में तैयार किया जाता है.
उसके बाद उसे उसे गाय के गर्भ में ट्रांसफर कर दिया जाता है. फिर तय वक्त के मुताबिक गाय बच्चा दे देती है. देश में छुट्टा गाय सियासी मुद्दा बन चुकी हैं. छुट्टा गायों की वजह से सड़क पर एक्सीडेंट हो रहे हैं तो खेतों में फसल खराब हो रही है. ये वो गाय हैं जिन्हें पशुपालकों ने दूध न मिलने पर छोड़ दिया है. लेकिन अब ऐसी हर एक गाय का इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसी तरह की गायों को ध्यान में रखते हुए ही इन दो रिसर्च पर काम किया गया है.
अल्ट्रासाउंड की मदद से गाय में अंडों की पहचान की जाती है.
गाय के उन अंडों को बाहर निकाला जाता है.
अंडों की संख्या 20 से 50 तक होती है.
दो महीने में तीन बार तक गाय के अंडे निकाले जा सकते हैं.
इन अंडों को लैब में बुल के सीमन के साथ फर्टिलाइज्ड किया जाता है.
अंडों और बुल के सीमन की फर्टिलाइज्ड प्रक्रिाया से भ्रूण बनता है.
लैब में तैयार भ्रूण को गाय के गर्भ में ट्रांसफर कर दिया जाता है.
फिर गाय 240 से 250 दिन में बच्चे को जन्म दे देती है.
एक बार में एक गाय में 20 से 50 अंडे बनते हैं.
प्रक्रिसया तरीके से बच्चा पैदा कराया जाए तो इन अंडों से गाय एक बच्चा देगी.
OPU-IVF तकनीक का इस्तेमाल कर 10 से 20 बच्चे पैदा कराए जा सकते हैं.
दो महीने में हमे एक गाय के अंडों से 30 से 60 बच्चे मिल सकते हैं.
एक गाय में 20 से 21 दिन में अंडे बनते हैं.
इस तकनीक से बच्चा पैदा कराने में समय की बचत होगी.
जबकि प्राकृतिक तरीके से बच्चा पैदा होने में 5 से 7 साल लगते हैं.
OPU-IVF तकनीक का इस्तेमाल कर गाय-भैंसों के पैदा होने में लगने वाले वक्त को कम किया जा सकेगा. साथ ही गायों के अंडों का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगे. साथ ही छुट्टा गायों का इस्तेमाल नस्ल बढ़ाने में किया जा सकेगा.
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