नंदिनी दूध के दाम बढ़ाने की मांग (फाइल फोटो)कर्नाटक के सहकारी दूध उत्पादक संघों (Cooperative Milk Unions) ने नंदिनी दूध की खरीद और खुदरा कीमत में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी की मांग की है. दुग्ध संघों का कहना है कि पशु चारा, हरा चारा, दवाइयों और डेयरी संचालन की लागत लगातार बढ़ने से किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. दुग्ध संघों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को बेंगलुरु स्थित विधान सौधा (विधानसभा) में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात की और कीमत बढ़ाने का प्रस्ताव सौंपा. प्रतिनिधिमंडल ने दूध उत्पादकों को मौजूदा लागत के मुकाबले बेहतर खरीद मूल्य देने की जरूरत बताई.
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अधिकारियों को पिछले 10 वर्षों में पशु चारे की कीमतों में हुए बदलाव का विस्तृत आंकड़ा तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने एक लीटर दूध के उत्पादन पर आने वाली लागत, अलग-अलग जिलों में दूध का उत्पादन और बिक्री तथा दुग्ध संघों की ओर से की जाने वाली खरीद का विवरण भी मांगा.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पड़ोसी राज्यों में दूध की खरीद कीमत और खुदरा दरों की जानकारी जुटाने को कहा है. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इन आंकड़ों के आधार पर कर्नाटक में दूध की कीमतों और उत्पादन लागत की स्थिति का आकलन किया जाएगा.
बेंगलुरु अर्बन, रूरल एंड रामनगर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स सोसाइटीज यूनियन लिमिटेड के चेयरमैन डीके सुरेश ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से मांग रखी. उन्होंने कहा कि पशुपालन की लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है. डीके सुरेश ने कहा, "पशु चारा, चारा सामग्री, दवाइयों और रखरखाव से जुड़े खर्च बढ़ने के कारण डेयरी किसानों की लागत काफी बढ़ गई है."
डीके सुरेश ने मौजूदा सूखे की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि फसल खराब होने से किसानों की आय प्रभावित हुई है और चारे की उपलब्धता कम होने के कारण डेयरी व्यवसाय चलाना भी मुश्किल हो रहा है. उन्होंने कहा, "मौजूदा सूखे की स्थिति में फसल नुकसान के कारण किसानों की आय में भारी गिरावट आई है. चारे की उपलब्धता कम होने से डेयरी किसान भी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं."
डीके सुरेश के मुताबिक, कई राज्यों में सहकारी संस्थाओं और निजी डेयरियों ने दूध और दूध से बने उत्पादों की कीमतों में समय-समय पर बढ़ोतरी की है. उनका कहना है कि कर्नाटक के दुग्ध संघों ने उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए करीब डेढ़ साल से दूध की कीमत में बढ़ोतरी नहीं की है.
दुग्ध संघों का कहना है कि निजी डेयरियां भी किसानों से ज्यादा दूध खरीदने की कोशिश कर रही हैं. इससे दूध की खरीद के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और सहकारी दुग्ध संघों के सामने किसानों को प्रतिस्पर्धी खरीद मूल्य देने की चुनौती है.
डीके सुरेश ने बताया कि कर्नाटक के दुग्ध संघ फिलहाल उत्पादकों से टोंड दूध के लिए 35 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीद कर रहे हैं. आंध्र प्रदेश में यह दर 41.50 रुपये, केरल में 41.80 रुपये, महाराष्ट्र में 41 रुपये और तमिलनाडु में 42.24 रुपये प्रति लीटर है.
डीके सुरेश ने दावा किया कि कर्नाटक में दूध का अधिकतम खुदरा मूल्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम से कम 12 रुपये प्रति लीटर कम है. दुग्ध संघों ने इसी अंतर और बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने की मांग रखी है. (पीटीआई)
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