
Milk Production कई बार ऐसा होता है कि गाय-भैंस अचानक से दूध देना कम कर देती है. उनकी ग्रोथ भी रुक जाती है. भूख भी कम लगती है. इतना ही नहीं शरीर में दर्द और बुखार जैसी परेशानियां बार-बार होने लगती हैं. कुछ मामलों में तो पशु बार-बार अपने पेट पर लात मारने लगता है. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो ऐसा तब होता है जब पशु को हार्डवेयर नाम की बीमारी हो जाती है. और ये बीमारी तब होती है जब पशु न पचने वाले आइटम जैसे कील, तार, प्लास्टिक या पत्थर खा लेते हैं. और ये सब आइटम पशु के पेट के एक हिस्से रेटिकुलम में फंस जाते हैं. कई बार तो नुकीले आइटम अंदरुनी अंगों को भी नुकसान पहुंचा देते हैं. ऐसे में फौरन ही पशु का एक्सरे करा लेना चाहिए.
वर्ना पशु की मौत भी हो सकती है. इलाज के साथ-साथ इससे बचाव के उपाय भी हैं. वो भी एकदम साइंटीफिक. हार्डवेयर रोग से बचाव के लिए गाय-भैंस के पेट में चुम्बक रखना भी एक ऐसा ही उपाय है. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी (गडवासु), लुधियाना इस पर काम भी कर रहा है. पशु चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. अश्विनी कुमार का कहना है कि डेयरी पशुओं में हार्डवेयर रोग की घटनाएं समय के साथ बढ़ रही हैं. यूनिवर्सिटी में आने वाले केसों से भी इसका प्रमाण मिलता है. लेकिन यूनिवर्सिटी में इसके इलाज की पूरी सुविधा है.
एक्सपर्ट का कहना है कि हार्डवेयर रोग से गाय-भैंस को बचाने के लिए जरूरी है कि एक दो से ढाई सेंटीमीटर का गोल चुम्बक हम उसके पेट में उतार दें. पशु चिकित्स्क की सलाह पर पशुपालक ये काम अपने घर पर भी कर सकते हैं. ये चुम्बक पेट में जाने के बाद पशु को किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है. अब गाय-भैंस मैटल की जो भी चीज खाती है तो वो पेट के रास्ते में इस चुम्बक से चिपक जाती है. चुम्बक से चिपकने के बाद मैटल भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है. लेकिन फिर भी पशु की निगरानी करते रहना चाहिए कि चुम्बक रखने के बाद उसके व्यवहार और उत्पादन में कोई फर्क तो नहीं आ रहा है. जब भी कोई फर्क नजर आए तो फौरन गाय-भैंस का एक्सरे करा लें. अगर एक्सरे से ये मालूम हो जाए कि चुम्बक के साथ मैटल की बहुत सारी चीजें आकर चिपक गई हैं तो ऑपरेशन करा लें. ये एक बहुत छोटी सी सर्जरी होती है. पशु की स्टैंडिंग पोजिशन में ही सर्जरी कर दी जाती है.
एक्सपर्ट का कहना है कि इस बीमारी के होने के वैसे तो बहुत सारे कारण ऊपर बताए जा चुके हैं. लेकिन जो सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण कारण है वो ये है कि पशु पहले ज्यादा बाहर जाकर चारा चरते थे. इस दौरान वो अपने दांतों का इस्तेमाल कर चारा खाते थे. लेकिन अब पशु बाहर खुले में कम जाते हैं और स्टॉल फीड ज्यादा करते हैं. और स्टॉल पर चारा खाने के दौरान पशु दांतों का कम जीभ का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें पता ही नहीं चल पाता है कि चारे के साथ वो मैटल का कोई आइटम भी खा रहे हैं. गौरतलब रहे स्टॉल पर चारा खाने के दौरान पशु चारे और मिनरल्स को पहले चबाने के बजाए निगल लेता है. और जब फुर्सत में होता है तो उस चारे की जुगाली करता है.
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