मध्यप्रदेश बनेगा देश का नंबर-1 मत्स्य उत्पादन राज्यमध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की सरकार किसानों और मछुआरों की आर्थिक समृद्धि के लिए पूरी मेहनत कर रही है. उन्होंने कहा कि जैसे राज्य कृषि उत्पादन में देश में आगे है, वैसे ही हमें मत्स्य उत्पादन में भी सक्रियता से काम करना है. उनका उद्देश्य है कि आने वाले कुछ वर्षों में मत्स्य उत्पादन को दोगुना किया जाए. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग को इस दिशा में पूरी योजना बनानी चाहिए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मछुआ कल्याण के लिए एक ऐसा इको सिस्टम तैयार किया जाए, जिससे मछुआरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके. इसके लिए मछली पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में विशेष काम किए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कृषक कल्याण वर्ष के अवसर पर मछुआ कल्याण को विशेष महत्व दिया जाए. मछुआ सम्मेलन आयोजित कर अच्छे काम करने वाले मछुआरों को प्रोत्साहित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संभाग स्तर पर मछली घर तैयार किए जाएं. यह मछुआरों के लिए एक मददगार स्थान होगा, जहां वे मछली पालन और अन्य एक्वाकल्चर गतिविधियों का अभ्यास कर सकेंगे. कम भू-जल वाले जिलों में फॉर्म पॉन्ड मॉडल के जरिए मत्स्य उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए एक जिले को मॉडल के रूप में तैयार किया जाएगा, जिसमें मछली के साथ सिंघाड़ा, कमल गट्टा और मखाना जैसी एक्वाकल्चर आधारित गतिविधियां भी शामिल होंगी.
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश केज कल्चर नीति पर काम किया जा रहा है. इसके तहत 10 हजार केज हितग्राही योजना और 90 हजार केज उद्यमी मॉडल बनाए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने मछुआ समृद्धि योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली. भोपाल में प्रस्तावित विशेष प्रोजेक्ट, इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क और रिसर्च सेंटर की भी जानकारी दी गई.
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मछुआरों के लिए ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता दी जाए. उन्हें नई तकनीक, बेहतर बीज और आधुनिक मछली पालन के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाए. इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के तहत वित्तीय सहायता भी दी जाएगी. इससे मछुआरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी.
प्रदेश में मत्स्य अनुसंधान और विकास पर भी जोर दिया जा रहा है. रिजर्वायर क्लस्टर आधारित मत्स्य पालन, टेक्नोलॉजी डिफ्यूजन सेंटर और समन्वित मछली घर एवं अनुसंधान केंद्र के जरिए मछुआरों को नवीनतम तकनीक और मदद उपलब्ध कराई जाएगी. इससे मछुआ उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार होगा.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि मध्यप्रदेश को मत्स्य पालन में देश का नंबर-1 राज्य बनाना है. इसके लिए राज्य सरकार पूरी योजना के साथ काम कर रही है. मछुआरों के कल्याण और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सभी विभागों को मिलकर कार्य करना होगा. आने वाले वर्षों में इस योजना से प्रदेश में मत्स्य उत्पादन दोगुना होने की उम्मीद है.
इस प्रकार मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की पहल मछुआरों के लिए सुनहरा अवसर है. इससे न केवल मछुआरों की आय बढ़ेगी, बल्कि मध्यप्रदेश पूरे देश में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन जाएगा.
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