Goat Disease: बाढ़ के हालात में बकरियों पर गंभीर बीमारी का खतरा; सभी पशुपालक बरतें ये सावधानियां

Goat Disease: बाढ़ के हालात में बकरियों पर गंभीर बीमारी का खतरा; सभी पशुपालक बरतें ये सावधानियां

Goat Disease: पंजाब और पड़ोसी राज्य बाढ़ का कहर बना हुआ है. बाढ़ के हालातों में जाहिर है कि इंसानों के साथ पशुओं में भी गंभीर बीमारियां बहुत तेजी से फैलती हैं. इस बीच बीटल जैसी बीकरियों की कुछ नस्लें हैं जो जल्दी इसकी चपेट में आ सकती हैं. इसको लेकर लुधियाना के पशु चिकित्सक विश्वविद्यालय ने एडवाइजरी जारी की है.

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बाढ़ के हालात में बकरियों पर गंभीर बीमारी का खतरा; सभी पशुपालक बरतें ये सावधानियांबाढ़ में बकरियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा

पंजाब और पड़ोसी राज्य इन दिनों लगातार बारिश और बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं. मगर इस बाढ़ के पानी से प्रतिकूल परिस्थितियां पनप रही हैं और इसके कारण बकरियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. खास तौर पर बीटल जैसी चुनिंदा नस्लों को इससे खतरा है. इसलिए बीटल के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए, बकरी पालकों को बकरियों के झुंड, प्रजनन पशुओं और बच्चों के प्रबंधन में अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है. साथ ही बकरियों की देखभाल के लिए सभी जरूरी इंतजाम करना जरूरी है.

बकरियों के साथ बरतें ये सावधानियां

  • इसी को लेकर गुरु अंगद देव पशु चिकित्सक विश्वविद्यालय, लुधियाना ने एडवाइजरी जारी की है.
  • इसमें कहा गया है कि बकरियों को आवश्यकतानुसार किसी विशेषज्ञ की सलाह से कृमिनाशक दवा देनी चाहिए.
  • गर्भवती पशुओं को बिना डॉक्टर केकी सलाह के कृमिनाशक दवा नहीं देनी चाहिए.
  • क्योंकि कई दवाएं गर्भवती बकरियों के लिए उपयुक्त नहीं होती हैं.
  • बकरियों को खुरपका-मुंहपका रोग और रक्तस्रावी सेप्टिसीमिया का टीका लगवाना जरूरी है.
  • अगर नहीं लगाया गया है, तो किसी विशेषज्ञ की देखरेख में संयुक्त टीका लगाया जा सकता है.
  • मगर ध्यान रहे कि ये वाला टीका किसी बीमार पशुओं को ना लगवाएं.
  • बकरियों की आंखों की श्लेष्मा झिल्लियों के रंग पर बारीकी से नज़र रखें.
  • अगर इसका रंग हल्का या पीला हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और उचित इलाज करवाएं.
  • शेड या बकरी बाड़े के फर्श/मिट्टी में लगातार नमी रहने से बकरियों को चकत्ते/त्वचा संक्रमण हो सकता है.
  • ऐसे में बकरी के शेड के फर्श को जितना हो सके उतना सूखा रखने का प्रयास करें.

बकरियां ना पी पाएं बाढ़ का पानी

  • बाढ़ का पानी मल, भारी धातुओं या औद्योगिक कचरे के कारण कई तरह की विषाक्तता पैदा कर सकता है.
  • बकरी पालकों को यह सुनिश्चित करने का पूरा प्रयास करना चाहिए कि बकरियां चरते समय बाढ़ का पानी न पिएं.
  • इस बात का भी पूरा ध्यान रखें कि बरियों को निचले इलाकों में चरने से बचना चाहिए.
  • क्योंकि यहां का पानी बकरियों में परजीवी रोगों का कारण भी बन सकता है.
  • वहीं मेमनों को पिलाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी को 10-15 मिनट तक उबालें और ठंडा करके पिलाएं.
  • हो सके तो धूप वाले दिन खुरों को 5 प्रतिशत फॉर्मेलिन या चूने के घोल से साफ़ करना चाहिए.
  • अगर बकरियों के खुर बड़े हो गए हों, तो पानी सूखने के बाद उन्हें काट देना चाहिए.
  • बकरियों को फफूंदयुक्त अनाज या घटिया किस्म का चारा न खिलाएं.
  • क्योंकि इससे बकरी को विषाक्तता, अपच और गर्भपात हो सकता है.

अगर पशुपालकों अपनी किसी समस्या का समाधान चाहिए तो इसके लिए विश्वविद्यालय से 62832-58834 और 62832-97919 पर संपर्क कर सकते हैं.

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