ये देश का पहला क्लोन पीटी बुल हिसार गौरव है. हर एक पशुपालक चाहता है कि उसकी गाय-भैंस ज्यादा दूध दे, बीमार कम पड़े, ग्रोथ तेजी से हो, इतना ही नहीं सबसे मुख्य बात ये कि वक्त से बच्चा दे. क्योंकि ये सब वो बातें हैं जो पशुपालन की लागत को कम करती हैं और मुनाफा बढ़ाती हैं. एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो ये कोई मुश्किजल काम नहीं है. बस जरूरत इस बात की है कि जब गाय या भैंस हीट में आए तो उसे ऐसे सांड से गाभिन कराया जाए जो वीर्य क्वालिटी के मामले में हेल्दी हो और जिसका पिछला इतिहास भी अच्छा हो.
इसके लिए बस तीन खास बातों ख्याल रखना बहुत जरूरी है. ये तीनों ही बातें बुल (सांड) से जुड़ी हुई हैं. कृत्रिम गर्भाधान के लिए बुल कैसा हो, इसे ध्यान में रखते हुए ही हर नस्ल के ब्रीडर सांड तैयार किए जा रहे हैं. खानपान और रहन-सहन से संबंधित एडवाइजरी जारी की जाती हैं. यहां तक की गाय-भैंस को गाभिन कराने के लिए भी ब्रीडर सांड कैसा हो इसके लिए भी गाइड लाइन तैयार की गई है.
केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार, हरियाणा के रिटायर्ड साइंटिस्ट डॉ. सज्जन सिंह का कहना है कि कृत्रिम गर्भाधान के लिए किसी भी सांड का वीर्य (सीमन) चुनने से पहले सबसे पहले ये पता कर लें कि सांड की मां कितना दूध देती थी. दूसरा ये कि वीर्य का इस्तेमाल सिर्फ प्रोजेनी टेस्टिंग बुल का ही करें. ये नस्ल सुधार में सहायक होते हैं. किसान अगर उत्पादन और नस्ल सुधार चाहते हैं तो ये सिर्फ प्रोजेनी टेस्टिंग बुल के वीर्य से ही संभव होगा. तीसरी सबसे खास बात ये कि गाय-भैंस को गाभिन कराने के लिए कभी भी बुग्गा गाड़ी में जोते गए बुल या फिर दूसरे कमर्शियल काम में लगे सांड के वीर्य का इस्तेमाल कभी ना करें.
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