Goat Health: बदलते मौसम से बकरी पालकों की बढ़ी मुश्किल, एक्‍सपर्ट ने बताईं जरूरी सावधानि‍यां और बचाव के तरीके

Goat Health: बदलते मौसम से बकरी पालकों की बढ़ी मुश्किल, एक्‍सपर्ट ने बताईं जरूरी सावधानि‍यां और बचाव के तरीके

बदलते मौसम के कारण बकरी पालन पर संकट बढ़ता जा रहा है. अचानक गर्मी, बारिश और ठंड के उतार-चढ़ाव से बकरियों में बीमारी का खतरा बढ़ रहा है, जिससे पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.

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Goat Health: बदलते मौसम से बकरी पालकों की बढ़ी मुश्किल, एक्‍सपर्ट ने बताईं जरूरी सावधानि‍यां और बचाव के तरीकेबकरी पालन

इन दिनों मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. कभी तेज धूप, फिर अचानक बारिश और फिर ठंड जैसी स्थिति पशुपालकों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आ रही है. खासतौर पर बकरी पालन करने वाले किसानों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि बकरियां मौसम के उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं. बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में अस‍िस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ. दुष्यंत कुमार ने ‘किसान तक’ को बताया कि बदलते मौसम का सबसे ज्यादा असर पशुधन पर पड़ता है, जिसमें बकरियां और पोल्ट्री सबसे अधिक संवेदनशील होती हैं. खासकर गर्भवती बकरियां और नवजात बच्चे इस मौसम में ज्यादा जोखिम में रहते हैं. अचानक तापमान में बदलाव से निमोनिया, खांसी और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे कई बार जानवरों की मौत तक हो जाती है.

बारिश-ठंड-गर्मी का मिला-जुला असर

मार्च और अप्रैल जैसे महीनों में जहां सामान्यतः मौसम स्थिर रहता था, अब वहां भी तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. कभी गर्मी बढ़ जाती है तो अचानक बारिश और ठंड जैसी स्थिति बन जाती है. इस अस्थिर मौसम के कारण बकरियों के शरीर का संतुलन बिगड़ता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है.

आवास प्रबंधन में सबसे ज्यादा लापरवाही

मौसम के अचानक बदलाव के कारण पशुपालक अक्सर बकरियों के शेड प्रबंधन में चूक कर जाते हैं. गर्मी लगते ही छप्पर या बोरे हटा दिए जाते हैं, लेकिन अचानक ठंड या बारिश आने पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पाती. इससे बकरियां ठंड की चपेट में आ जाती हैं और बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है.

खानपान में भी जरूरी बदलाव

डॉ. दुष्‍यंत कुमार ने कहा कि बदलते मौसम में बकरियों के आहार पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है. तापमान में गिरावट या बारिश के समय उन्हें अतिरिक्त ऊर्जा देने के लिए दाना और संतुलित आहार बढ़ाना चाहिए. इससे उनका शरीर मौसम के बदलाव को सहन कर पाता है.

छोटे बच्चों की खास देखभाल जरूरी

डॉ. दुष्‍यंत कुमार के मुताबिक, बकरी के बच्चों यानी मेमनों पर इस मौसम का सबसे ज्यादा असर पड़ता है. उन्हें हमेशा सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए. बाड़े की सफाई, सूखा बिछावन और ठंड से बचाव के इंतजाम बेहद जरूरी हैं. थोड़ी-सी लापरवाही भी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है.

वैज्ञानिक तरीके से शेड बनाना जरूरी

अब पारंपरिक तरीके से बकरी पालन करना पर्याप्त नहीं है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे शेड तैयार किए जाएं जो हर मौसम के अनुकूल हों. जैसे ऊंचे (raised) प्लेटफॉर्म पर बने बाड़े, जिनमें नीचे से हवा का प्रवाह बना रहे और ऊपर से बारिश और ठंड से बचाव हो सके. जरूरत पड़ने पर पर्दे या कवर लगाकर तापमान नियंत्रित किया जा सकता है.

सही नस्ल का चयन भी अहम

बकरी पालन में नस्ल का चयन भी बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. ऐसी नस्लों का चुनाव करना चाहिए जो स्थानीय मौसम के अनुरूप खुद को ढाल सकें. उदाहरण के तौर पर ब्लैक बंगाल नस्ल विभिन्न मौसम परिस्थितियों में बेहतर अनुकूलन क्षमता रखती है.

समय के साथ बदलना जरूरी

उन्‍होंने कहा कि जब मौसम का पैटर्न बदल रहा है तो पशुपालकों को भी अपने तरीके बदलने होंगे. मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखना, समय रहते पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखना और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार प्रबंधन करना ही नुकसान से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.

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