बकरी पालन के लिए जरूरी टिप्सएक महीने की उम्र वाले बकरी के बच्चे से भी बकरी पालन में मुनाफा शुरू हो जाता है. गोट एक्सपर्ट की मानें तो बकरी पालन दोहरा मुनाफा कराने वाला पशुपालन सेक्टर है. लेकिन बकरी पालन में जरूरी ये है कि मृत्यु दर को कैसे कम किया जाए. पैदा होने वाले छोटे बच्चों को कैसे बिना किसी बीमारी और जोखिम के बड़ा किया जाए. क्योंकि बकरी पालन में सबसे ज्यादा मृत्यु दर बढ़ने से ही होता है. केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान (CIRG), मथुरा के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. एमके सिंह भी बकरी पालन में मृत्यु दर कम करने पर ज्यादा जोर देते हैं.
उनका कहना है कि अगर बकरी पालन इसके लिए सीआईआरजी के दिए गए चार्ट का ही पालन कर लेंगे तो उन्हें मृत्यू दर को कम करने के लिए कोई लम्बा-चौड़ा बजट बनाने और खर्च करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. और फिर अगर बकरे-बकरियों को दूध और मीट के लिए पाला जाता है. अगर आपकी जरूरत दूध की है तो आप अपने बाड़े में ज्यादा से ज्यादा दूध देने वाली बकरियों की संख्या बढ़ा सकते हैं. और अगर आप मीट के लिए सिर्फ बकरे ही पालते हैं तो आर्टिफिशल इंसेमीनेशन तकनीक से बच्चा वजनदार और तंदरुस्त होगा.
डॉ. एमके सिंह ने किसान तक को बताया कि छोटे बच्चों के लिए मौसम सबसे बड़ा दुश्मन होता है. ज्यादा गर्मी और कड़ाके की ठंड नुकसान पहुंचाती हैं. इसलिए मौसम को देखते हुए यह जरूरी हो जाता है कि बकरियों से बच्चा कब पैदा कराएं. जैसे नॉर्थ इंडिया में बकरियों के बच्चों में सबसे ज्यादा मृत्यु दर देखी गई है. क्योंकि यहां गर्मी और सर्दी के मौसम में बड़ा उलटफेर होता है. इसलिए अच्छा होगा कि 15 अप्रैल से 30 जून तक बकरी को गाभिन कराएं. वहीं उससे आगे की बात करें तो अक्टूबर और नवंबर में बकरी को गाभिन करा सकते हैं.
ऐसा करने से जो बकरी अप्रैल से जून तक गाभिन हुई है वो अक्टूरबर-नवंबर में बच्चा दे देगी. वहीं जो अक्टूबर-नवंबर में गाभिन हुई है वो फरवरी-मार्च में बच्चा देगी. मौसम के हिसाब से यह वो महीने हैं जब ना तो ज्यादा गर्मी होती है और ना ही ज्यादा सर्दी. मौसम के लिहाज से इन महीनों में बकरी के बच्चों को कोई तकलीफ नहीं होगी. बकरी पालन के लिहाज से यह वो महीने हैं जब बकरी के बच्चों को वजन तेजी से बढ़ता है.
डॉ. एमके सिंह ने बकरी के बच्चों की मृत्यु् दर कम करने के लिए जो तरीके बताए उसमे यह भी शामिल है कि जैसे ही बच्चा पैदा हो उसे फौरन ही मां का दूध पिलाएं. फिर चाहें बकरी ने बच्चा देने के बाद जैर गिराई हो या नहीं. बच्चे का वजन एक किलो होने पर उसे 100 से 125 ग्राम तक दूध पिलाएं. दूध दिनभर में तीन से चार बार में पिलाएं. मौसम से बचाने के उपाय भी अपनाएं. जब बच्चा 18 से 20 दिन का हो जाए तो से पत्तियों की कोपल देना शुरू कर दें. एक महीने का होने पर पिसा हुआ दाना खिलाएं.
बच्चा तीन महीने का हो जाए तो उसका टीकाकरण शुरू करा दें. और इस सब के बीच इस बात का खास ख्याल रखें कि जब बकरी बच्चा देने वाली हो तो उससे डेढ़ महीने पहले से बकरी को भरपूर मात्रा में हरा, सूखा चारा और दाना खाने को दें. इससे होगा यह कि पेट में पल रहे बच्चे तक भी अच्छी खुराक पहुंचेगी और जब बच्चा पैदा होगा तो उसके बाद बकरी दूध भी अच्छा और ज्यादा देगी.
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