प्रतीकात्मक फोटो.New Breed Cow दूध देने वाले पशुओं भेड़-बकरी, भैंस और ऊंट समेत सभी पशुओं से ज्यादा देश में रजिस्टर्ड नस्ल गाय की हैं. गायों का कुनबा लगातार तेजी से बढ़ रहा है. साल 2025 तक गायों की रजिस्टर्ड नस्ल की संख्या 51 थी. लेकिन अभी एक दिन पहले ही एक बार फिर राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, करनाल (NBAGR) ने गायों की चार और नई नस्ल को इस कुनबे में शामिल किया है. जिसे मिलाकर गायों की अब रजिस्टर्ड नस्ल की संख्या 55 हो गई है. इन चार नई गायों की खासियत ये है कि ये दूध भी देती हैं तो खेतों में भी काम करती हैं.
इसमे से दो गाय सिंथेटिक नस्ल की हैं. ये सभी गाय यूपी, हरियाणा और झारखंड की हैं. गायों के साथ ही भैंस की एक नस्ल को भी रजिस्टर्ड टैग दिया गया है. गौरतलब रहे मध्य प्रदेश, यूपी, राजस्थान और बिहार में गायों की सबसे ज्यादा संख्या है. मेरठ, यूपी में देश का सबसे बड़ा कैटल रिसर्च सेंटर बनाया गया है. देसी नस्ल की गायों की संख्या बढ़ाने के लिए आर्टिफिशल सीमेन टेक्नोलॉजी भी इस्तेमाल की जा रही है. यूपी के कई शहरों में काऊ सेंचुरी बनाई गई हैं.
रोहिलखंडी गाय उत्तर प्रदेश के बरेली, बदायूं और पीलीभीत जिलों में पाई जाती है. इनका रंग ज़्यादातर सफ़ेद और ग्रे होता है. इनका चेहरा पतला, सपाट और धंसा हुआ होता है. आंखों की पलकें सफ़ेद होती हैं. सींग ज़्यादातर बाहर की ओर ऊपर मुड़े हुए होते हैं. सींग के सिरे नुकीले होते हैं. पूंछ लंबी होती है. माथा सीधा होता है. उभरे हुआ सिर का ऊपरी हिस्सा पतला, सपाट और धंसा हुआ होता है. बैल अपेक्षाकृत लंबे होते हैं और उनमें वजन खींचने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है. औसत दूध उत्पादन 5.21 किलोग्राम प्रतिदिन है और दूध देने की अवधि औसतन 210 दिन होती है. अनुमानित आबादी लगभग तीन लाख है.
इस नस्ल का मूल क्षेत्र पलामू, लातेहार और गढ़वा, झारखंड में है. यह मध्यम आकार की गाय है. इस नस्ल के गाय-बैल को खासतौर से बोझा ढोने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इनका रंग ज़्यादातर ग्रे होता है. थूथन, पलकें, खुर और पूंछ का सिरा काला होता है. माथा सपाट होता है और कान खड़े होते हैं. मेदिनी मवेशियों में कूबड़ कंधे के आगे होते है. ये जानवर मुख्य रूप से चराई पर पाले जाते हैं. औसत दूध उत्पादन लगभग 1.6 किलो प्रतिदिन है. बैल जुताई के दौरान 7-8 घंटे काम कर सकते हैं. अनुमानित आबादी लगभग 14 लाख है.
करण फ्राइज नस्ल की गाय एक सिंथेटिक नस्ल. इस नस्ल को ICAR-NDRI (नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट), करनाल, हरियाणा ने विकसित किया है. ये नस्ल हरियाणा के करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत,
कैथल, जींद, यमुना नगर में पाली जाती है. करण फ्राइज नस्ल को होलस्टीन फ्राइज़ियन (HF) और थारपारकर नस्लों के क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित किया गया है. शरीर के कोट का रंग काला और सफेद होता है. कूबड़ नहीं होता है. गाय एक लैक्टेशन में 3550 किलोग्राम दूध देती हैं, जिसमें 305 दिनों में 5851 किलोग्राम दूध देने की क्षमता होती है. दूध का अधिकतम उत्पादन 46.5 किलोग्राम है. अनुमानित आबादी लगभग 20 हजार है.
वृंदावनी सिंथेटिक गाय को ICAR-IVRI, बरेली ने विकसित किया है. इसे उत्तर प्रदेश के बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं जिलों में पाला जा रहा है. इस नस्ल को 4 अलग-अलग नस्ल के पशुओं की क्रॉस ब्रीडिंग से विकसित किया गया है. इसमे HF, हरियाना, जर्सी और ब्राउन स्विस शामिल है. गाय का रंग मुख्य रूप से भूरा होता है. सिर पर उभरा हुआ पोल और अवतल माथा, किनारे की ओर मध्यम आकार के गोल किनारे वाले कान. दूध उत्पादन 3000 से 3500 किलोग्राम दुग्धकाल तक होता है. अनुमानित आबादी लगभग 10 हजार है.
मेलघाटी नस्ल की भैंस महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र में पाई जाती है. मेलघाटी का रंग काला और बालदार होता है; इनका माथा चौड़ा (गुंबद के आकार का), चेहरा लंबा और पतला, नाक की हड्डी नुकीली और आंखें उभरी हुई होती हैं. सींग शरीर के समानांतर होते हैं, पीछे की ओर मुड़े हुए और ऊपर, अंदर की ओर नुकीले होते हैं. मेलघाटी भैंस एक दिन में औसतन 4 किलो दूध देती है, और सबसे ज़्यादा दूध उत्पादन 10 किलो प्रतिदिन होता है. दूध में फैट 7 फीसद होता है. इन भैंसों की आबादी लगभग 28 हज़ार है.
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