ज्वार का चारा खिलाने से पहले किसान पढ़ लें ये जरूरी खबर, वरना मवेशियों की हो सकती है मौत

ज्वार का चारा खिलाने से पहले किसान पढ़ लें ये जरूरी खबर, वरना मवेशियों की हो सकती है मौत

एक्सपर्ट का कहना है कि हरे चारे में नमी की मात्रा काफी होती है. पशु जब हरा चारा खाने लगते हैं, तो उसे डायरिया सहित अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. साथ ही अधिक नमी के चलते ही दूध की क्वालिटी भी प्रभावित हो जाती है.

Advertisement
ज्वार का चारा खिलाने से पहले किसान पढ़ लें ये जरूरी खबर, वरना मवेशियों की हो सकती है मौतज्वार का हरा चारा कर सकता है नुकसान. (सांकेतिक फोटो)

गाय, भैंस और बकरी सहित सभी तरह के दुधारू पशुओं के लिए हरा चारा फायदेमंद माना गया है. लेकिन हम हरा चरा के नाम पर मवेशियों को कुछ भी नहीं खिला सकते हैं. इससे उनका हेल्थ प्रभावित हो सकता है. इसलिए पशुओं को मौसम के हिसाब से ही हरा चारा खिलाना चाहिए. इससे दुधारू पशु तंदरुस्त रहते हैं और उनकी दूध देने का पावर भी पहले के मुकाबले बढ़ जाता है. खास कर किसानों को ज्वार का हरा चारा खिलाने के दौरान बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि कई बार इसको खाने से बीमार पड़ने की संभावना रहती है.

गर्मियों के मौसम में हरा चरा दुधारू पशुओं के लिए बहुत ही जरूरी है. इस मौसम में हरा चारा खिलाने से उनके शरीर में पानी की कमी नहीं होती है और वे तनाव से भी बचते हैं. साथ ही पौष्टिक आहार मिलने से दूध का उत्पादन भी बढ़ जाता है. लेकिन गर्मी के मौसम में ज्वार का हरा चारा खिलाने के दौरान किसानों को सावधानी बरतनी चाहिए. क्योंकि थोड़ी से लापरवाही बरतने पर पशुओं की कई बार मौत भी हो जाती है. खास कर राजस्थान में इस तरह की कई घटनाएं आ चुकी हैं. 

ये भी पढ़ें- Animal Husbandry: गाय-भैंस को इस तरह का दें चारा, पहले से ज्यादा देने लगेगी दूध

पानी की कमी से पनपते हैं एचसीएन

पशु एक्सपर्ट की माने तो ज्वार का हरा चारा पशुओं के लिए फायदेमंद है, लेकिन कभी-कभी इसका नकारात्मक असर भी देखने को मिलता है. क्योंकि ज्वार का चारा आमतौर पर मार्च-अप्रैल में बोया जाता है. लेकिन हरे चारे के लिए रूप में इस्तेमाल करने के लिए किसान करीब दो महीने पहले ही ज्वार की कटाई शुरू कर देते हैं, जो एक गलत तरीका है. एक्सपर्ट के अनुसार, ज्वारा के हरे चारे को 50 दिन पहले नहीं काटना चाहिए. वहीं, इसकी प्रोपर तरीके से सिंचाई भी करनी चाहिए. क्योंकि ज्वार के हरे चारे में पानी की कमी होने पर उसमें हाइड्रोजन साइनाइड (एचसीएन) के तत्व पनपने लगते हैं. इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.

दूध में फैट का स्तर कैसे बढ़ाएं

खास बात यह है कि ज्वार के 100 ग्राम हरे चारे में जब एचसीएन का लेबल 20 मिलीग्राम से अधिक हो जाता है, तब ज्वार की बढ़ोतरी रुक जाती है. इसकी हाइट 3 से 5 फ़ीट तक ही रह जाती है. ऐसे में जब हम पशुओं के इस चारे को खिलाते हैं, तो उसके लीवर का एंजाइम खत्म हो जाता है. धीरे-धीरे एचसीएन पशु के शरीर में स्टोर होने लगता है. इससे पशु की मौत भी हो जाती है. हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि हरे चारे में नमी की मात्रा काफी होती है. पशु जब हरा चारा खाने लगते हैं, तो उसे डायरिया सहित अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. साथ ही अधिक नमी के चलते ही दूध की क्वालिटी भी प्रभावित हो जाती है. इसलिए पशुओं को हमेशा सूखे चारे के साथ ही हरा चरा खाने के लिए दें. साथ ही कुछ अनाज भी आहार के रूप में दें. इससे दूध में फैट का स्तर बढ़ जाएगा और उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा. 

ये भी पढ़ें- बंगाल की खाड़ी में बना लो प्रेशर एरिया... ओडिशा, आंध्र समेत इन राज्यों में हो सकती है बारिश

 

POST A COMMENT