
Egg Testing by FSSAI अंडा अगर 28 से 30 डिग्री तापमान में है तो आराम से 10 से 15 दिन तक खाया जा सकता है. वहीं फ्रिज में सही तरीके से स्टोर करने पर अंडे को एक महीने तक रखकर खाया जा सकता है. ऐसा करने से किसी तरह का कोई नुकसान नहीं है. हैल्थ को नुकसान तब होता है जब हम अंडा स्टोर करने में गलतियां करते हैं. जैसे बहुत ज्यादा तापमान होने पर अंडे कई-कई दिन तक खुले में ही रखे रहते हैं. कई बार ऐसा उस दुकान और स्टोर पर भी होता है जहां अंडे बिकने के लिए खुले में ही रखे रहते हैं. यहां तक की पोल्ट्री फार्म पर भी.
इतना ही नहीं फ्रिज में भी अंडा रखने के दौरान ज्यादातर लोग गलतियां करते हैं. इसी को देखते हुए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अंडों को स्टोर करने के संबंध में एडवाइजरी जारी की है. ये उनके लिए भी है जो घर में 5 से 10 अंडे भी स्टोर करके रखते हैं. सिर्फ स्टोर करने संबंधी ही नहीं, किस तरह के अंडे नहीं खाने चाहिए ये भी FSSAI ने अपनी एडवाइजरी में बताया है.
यूपी पोल्ट्री एसोसिएशन के प्रेसिडेंट और पोल्ट्री एक्सपर्ट नवाब अली अकबर का कहना है कि अंडे फ्रिज में अंदर की ओर रखने चाहिए. दरवाजे में अंडे रखने से वो जल्दी खराब हो जाते हैं. क्योंकि अगर फ्रिज का दरवाजा दिन में 10 बार भी खुला और बंद हुआ तो अंडों का तापमान जल्दी-जल्दी बदलता रहता है.
FSSAI ने अपनी एडवाइजरी में साफ कहा है कि गंदे और टूटे हुए अंडों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. टूटे हुए अंडे के छिलके बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए सही जगह होते हैं. साथ ही गंदे अंडे खरीदने से भी बचें. गंदे अंडे दूसरे खाने की चीजों को भी खराब कर सकते हैं. ये जरूरी नहीं है कि गंदे अंडे दूषित हों और उसमे बदबू आए. साथ ही गंदे अंडों को धोने से भी बचना चाहिए. क्योंकि अंडे गीले होने पर उनमे ज़्यादा पोरस हो जाते हैं, जिससे बैक्टीरिया आसानी से अंडों के अंदर चले जाते हैं.
अंडे 28 से 30 डिग्री तापमान पर 10-12 दिनों तक ताजा रह सकते हैं. लेकिन जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा तो शेल्फ लाइफ भी कम होती जाएगी. अंडों की ताज़गी बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है कि तापमान और नमी का बैलेंस बनाए रखा जाए. वैसे सबसे अच्छा है कि अंडों को रेफ्रिजरेटर में तय शेल्फ या अंडे के केस में स्टोर किया जाए. अंडे हमेशा ठंडे तापमान (एयर-कंडीशन्ड) और अच्छी हवादार ढकी हुई जगहों पर ही रखें जहां आस-पास का तापमान भी 28 से 30 डिग्री हो.
जैसे ही आप किसी बर्तन में अंडा तोड़ते हैं तो जर्दी (पीला हिस्सा) गोल, छोटा और जेल जैसा गाढ़ा दिखेगा. ये अंडे के सफेद हिस्से में बीच में खड़ा दिखेगा.
अंडे के सफेद हिस्से का जेल जैसी जर्दी पानी की तरह से फैलती नहीं है बल्कि कॉम्पैक्ट रहती है.
जैसे-जैसे अंडा पुराना होता जाता है या सही तापमान नहीं मिलता है तो अंडे का सफेद हिस्सा पतला और बहने वाला हो जाता है. पुराने और खराब अंडों में अंडे की जर्दी और सफेद हिस्सा एक-दूसरे में घुल जाते हैं. ऐसा होने पर कई बार अंडे में से बदबू भी आने लगती है.
अंडे के पुराने और खराब होने पर सफेदी पतली हो जाती है. इसे जब फेंटते हैं तो झाग बनाने में ज़्यादा वक्त लगता है. इतना ही नहीं फेंटने पर झाग भी कम वक्त के लिए बनता है और जल्दी ही बैठ जाता है. हालांकि कई बार ताजा अंडों में भी बहुत ज्यादा झाग नहीं बनता है और झाग बनने में वक्त भी लगता है. लेकिन जब झाग बन जाता है तो वो फिर बहुत देर बाद ही बैठता है. सबसे ज़्यादा और अच्छा झाग तीन या चार दिन पुराने अंडों में बनता है.
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