यूपी के दुग्ध उत्पादकों और निवेशकों की चमकी किस्मतदूध बेचकर रेवेन्यू आता है मुनाफा नहीं. ये कहना है डेयरी एक्सपर्ट का. एक्सपर्ट की मानें तो किसी भी डेयरी कंपनी के दूध से बने जितने प्रोडक्ट बिकेंगे तो उतना ही कंपनी का मुनाफा बढ़ेगा. सिर्फ दूध बेचकर कोई भी डेयरी कंपनी न तो बड़ी बनी है और न ही उसका टर्न ओवर बढ़ा है. अमूल का एक बड़ा उदाहरण हमारे सामने है. एक और चौंकाने वाली बात ये है कि अकेले गर्मियों में आइसक्रीम बेचकर ही डेयरी कंपनियां साल का आधा मुनाफा कमा लेती हैं. जब तक कंपनियों का दही, छाछ, लस्सी, आइसक्रीम और दूसरे प्रोडक्ट नहीं बिकेंगे तो कंपनी मुनाफे में नहीं आएगी.
इसीलिए कंपनियां दूध से बने प्रोडक्ट को बेचने के लिए डेयरी के नए मॉडल क्वालिटी, ब्रांड और पैकिंग पर खास जोर देने लगी हैं. ठीक इसी तरह से पशुपालन में भी सिर्फ दूध बेचने से न तो अच्छा मुनाफा आएगा और न ही रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. इसलिए जरूरी है कि दूध को ज्यादा से ज्यादा दही, घी-मक्खन समेत दूसरे प्रोडक्ट में बदला जाए. कोरोना के बाद से आज लोगों की प्रोटीन की डिमांड बढ़ गई है. वेजिटेरियन प्रोटीन का नाम आते ही जरूरतमंद डेयरी प्रोडक्ट की तरफ ही देखते हैं.
भारत का संगठित डेयरी सेक्टर नए बाजारों की तलाश में लग गया है. कंपनी छोटी हो या बड़ी सभी दूध से बने अलग-अलग प्रोडक्ट लाकर अपने बाजार को मजबूत करने में लगे हुए हैं. उनका मानना है कि इसी से मुनाफा बढ़ेगा. क्योंकि सिर्फ दूध बेचकर बाजार में एंट्री की जा सकती है, लेकिन बड़ा मुनाफा सिर्फ डेयरी प्रोडक्ट से ही आता है.
डेयरी कंपनी की रणनीति और वित्त प्रबंध निदेशक का कहना है कि "दूध सिर्फ एक शुरुआत है. दूध से रेवेन्यू आता है, लेकिन मार्जिन कम है. असल मुनाफा दही और दूध से बने दूसरे प्रोडक्ट बनाकर ही आएगा. डेयरी ऑर्गेनिक के सीईओ और सह-संस्थापक का कहना है कि निश्चित खपत पैटर्न कंपनियों को कुछ नया करने के लिए प्रेरित करते हैं. असल मुनाफा डेयरी प्रोडक्ट का पोर्टफोलियो बड़ा करने से ही आएगा. उन्होंने मुनाफे के लिए प्रोटीन युक्त डेयरी उत्पादों की बढ़ती मांग की ओर इशारा किया.
डेयरी व्यापार और ब्रांड रणनीति विशेषज्ञ ने डेयरी सेक्टर में एक बड़ी लड़ाई की भविष्यवाणी की है. उनका कहना है कि प्रोटीन की लड़ाई में जो खिलाड़ी हावी होंगे वो बाजार की लड़ाई जीतेंगे, क्योंकि डेयरी ब्रांडों के लिए भूगोल इतिहास है. हम नए बाजारों में और ज्यादा खिलाड़ियों को प्रवेश करते देखेंगे.
डेयरी के हालात को देखते हुए ही अमूल ने अमेरिका और यूरोप के बाजार में एंट्री की है. कर्नाटक की नंदिनी डेयरी ने दिल्ली में कदम बढ़ा दिए हैं. हैटसन एग्रो प्रोडक्ट लिमिटेड (HAP) ने ओडिशा में डेयरी स्टार्ट-अप मिल्क मंत्रा को 233 करोड़ रुपये लगाकर अधिग्रहित किया है.
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