तमाम कोशिशों के बावजूद गर्भ धारण नहीं कर रही गाय-भैंस तो बांझपन की है समस्या, ये रहे संकेत, तुरंत करें इलाज

तमाम कोशिशों के बावजूद गर्भ धारण नहीं कर रही गाय-भैंस तो बांझपन की है समस्या, ये रहे संकेत, तुरंत करें इलाज

चिकित्सकों की माने तो सही तरह से प्रबंधन नहीं करने पर भी दुधारू पशुओं में बांझपन होता है. अगर दुधारू पशुओं को पौष्टिक और उचित आहार नहीं दिया गया, तो उनके मां बनने में समस्याएं आती हैं. इसलिए पशुओं को आहार में मिनरल्स का मिक्सचर जरूर देना चाहिए. साथ में पशुओं का रखरखाव भी बेहतर होना चाहिए.

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तमाम कोशिशों के बावजूद गर्भ धारण नहीं कर रही गाय-भैंस तो बांझपन की है समस्या, ये रहे संकेतगाय-भैंस में बढ़ रही बांझपन की समस्या. (सांकेतिक फोटो)

दुधारू पशुओं में बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है. इससे पशुपालकों को खासा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. लेकिन पशु एक्सपर्ट का कहना है कि यह ज्यादा गंभीर समस्या नहीं है. अगर आप दुधारू पशुओं का समय पर इलाज कराते हैं, तो उन्हें बांझपन नहीं होगा. आपकी गाय-भैंस समय पर गर्भ धारण करेंगी और स्वस्थ्य बछड़े को भी जन्म देंगी. साथ ही उनके दूध देने की क्षमता भी पहले की तरह ही बरकरार रहेगी. बस इसके लिए किसानों को पशुओं से संबंधित कुछ जानकारियां रखनी होगी.

एक्सपर्ट्स की माने तो डेयरी संचालकों के लिए पशुओं में बांझपन आना एक बहुत बड़ी परेशानी की सबब मन गई है. लेकिन उन्हें इसे लेकर अब चिंता करने की जरूरत नहीं है. पशु विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मादा पशुओं में बांझपन की समस्या जन्मजात होती है. वहीं, कई बार नर पशुओं के अंदर समस्याएं होती हैं. अगर ऐसे में नर पशुओं के सीमेन का उपयोग गाय या भैंस के गर्भधारण करने में किया जाता है, तो यह सक्सेस नहीं हो पाएगा. इसलिए डेयरी संचालकों को हमेशा हेल्दी नर पशुओं का ही सीमेन प्रजनन के लिए इस्तेमाल में लाना चाहिए.

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पशुओं का तुरंत इलाज है जरूरी

ऐसे देसी गाय-भैंस की बछड़े जन्म के तीन साल बाद बच्चा देने के लिए योग्य हो जाती हैं. उनमें हर 21 दिनों के अंतराल पर गर्भाधारण करने की अवस्था आती है. यदि तीन कोशिशों के बवाजूद भी आपकी मवेशी गर्भ धारण नहीं कर पा रही है, तो उसमें बांझपन की समस्या है. ऐसे में किसानों को अपने पशुओं का अच्छे चिकित्सकों से इलाज कराना चाहए, ताकि बांझपन का सही इलाज किया जा सके.

कृत्रिम गर्भाधान की लें मदद

अगर आप चाहें तो कृत्रिम गर्भाधान विधि का भी इस्तेमाल पशुओं के प्रजनन के लिए कर सकते हैं. यदि आपकी मादा पशु गर्भवती होने के लिए तैयार है, तो आप कृत्रिम गर्भाधान की भी मदद ले सकते हैं. इस दौरान आपको स्वस्थ्य नर पशु के सीमेन का उपयोग करना होगा. अगर इसके बाद भी पशु में बांझपन की समस्या आती है, तो विशेषज्ञों की सलाह पर किसानों को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि पशु डॉक्टर ने उच्च क्वालिटी के नर पशु का सीमेन का उपयोग किया है. अगर सीमेन की क्वालिटी अच्छी नहीं है या सही समय पर उसका उपयोग नहीं किया गया है, तब भी पशु बांझपन की शिकार हो जाती है.

बेहतर प्रबंधन होना जरूरी

चिकित्सकों की माने तो सही तरह से प्रबंधन नहीं करने पर भी दुधारू पशुओं में बांझपन होता है. अगर दुधारू पशुओं को पौष्टिक और उचित आहार नहीं दिया गया, तो उनके मां बनने में समस्याएं आती हैं. इसलिए पशुओं को आहार में मिनरल्स का मिक्सचर जरूर देना चाहिए. साथ में पशुओं का रखरखाव भी बेहतर होना चाहिए. गर्मी के मौसम में पशुओं को कुलर और पंखा में बांधना चाहिए. ऐसे भी ज्यादा गर्मी की वजह से पशु तनाव में आते हैं. फिर उनमें बांझपन की समस्या उत्पन्न होती है.

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इन्फेक्शन भी है बांझपन का कारण

कई बार मादा पशुओं की बच्चेदानी में इन्फेक्शन हो जाता है. इसके चलते भी उन्हें गर्भ धारण करने में समस्या आती है. खास बात यह है कि बच्चेदानी में इन्फेक्शन की पहचान करने का तरीका बहुत ही आसान है. अगर गर्भाधान के लिए तैयार पशु का स्राव शीशे की तरह साफ नहीं है, धुंधला या दूधिया स्राव हो रहा है, तो बच्चेदानी में इन्फेक्शन हो सकते हैं. ऐसे में पशुपालकों को चिकित्सकों से तुरंत गाय-भैंस की बच्चेदानी का इलाज कराना चाहिए. अगर इसके बाद भी यह समस्या बनी हुई है, तो उनके हार्मोन की जांच बेहद जरूरी है. साथ ही उन्हें खाने में पौष्टिक चारा देना चाहिए.

 

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