किसानों की आय में इजाफा करने के मकसद को पूरा करने में पशुपालन अहम हथियार साबित हो रहा है. इनमें Small and Marginal Farmers के लिए बकरी पालन उल्लेखनीय है. छत्तीसगढ़ सरकार की बकरी पालन योजना वनांचल के Tribal Farmers की आजीविका का मुख्य आधार बन कर उभरी है. आदिवासी किसान कुलदीप ने बकरी पालन से लखपति बन कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बने है.
गोवंश के संरक्षण को लेकर यूपी की राह पर चलते हुए अन्य BJP Ruled States भी अब सख्त प्रावधान करने लगे हैं. इस दिशा में आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने भी गोवंश की तस्करी, वध एवं मांस की बिक्री करने पर कानून में सजा और जुर्माने का प्रावधान किया है. राज्य सरकार अब इस तरह के मामलों में सख्ती से निपटेगी.
बारिश का मौसम शुरू होने से पहले मछलियों का Breeding Period प्रारंभ हो जाता है. मछलियों के अंडा देने का यह समय No Fishing Period के रूप में जाना जाता है. भारतीय परंपरा में भी इस दौरान मछली पकड़ने को पाप का दर्जा दिया गया है. कानून में भी इस परंपरा का पालन करते हुए राज्य सरकारें जून से अगस्त तक बारिश के दौरान मछली पकड़ने को प्रतिबंधित कर देती हैं.
छत्तीसगढ़ की मुख्य फसल धान है, इसलिए इस राज्य को 'धान का कटोरा' कहा जाता है. मगर, अब राज्य की नवगठित विष्णु देव साय सरकार ने इस छवि को Crop Diversification की मदद से बदलने का उपक्रम शुरू किया है. इसमें Small and Marginal Farmers को डेयरी सेक्टर से जोड़ कर उनकी आय बढ़ाने की तैयारी है.
यूपी, एमपी और छत्तीसगढ़ में किसानों ने मवेशियों के चारे का संकट बता कर अपने गोवंश को बेसहारा छोड़ दिया है. इस वजह से इन राज्यों में गाय और बैल सड़कों पर आवारा घूमने को अभिशप्त हो गए हैं. इससे सड़क हादसों में भी इजाफा हुआ है. छत्तीसगढ़ में सरकार ने बेसहारा गोवंश से सड़क हादसों की समस्या से निपटने के लिए पशुपालकों पर जुर्माना लगाने और जानवरों को रेडियम बेल्ट पहनाने जैसे उपाय किए हैं.
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खेती पर आधारित है. कृषि कार्यों के लिहाज से छत्तीसगढ़ में धान की खेती के बाद किसानों का Fish Farming यानी मछली पालन पर पूरा जोर रहता है. छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की ओर से मछली के बेहतर गुणवत्ता वाले बीज का उत्पादन करने पर खास जोर दिया जा रहा है. इसी का नतीजा है कि Fish Seed Production के मामले में छत्तीसगढ़ देश के अन्य राज्यों की तुलना में 5वें पायदान पर आ गया है.
छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के जरिये किसान गोबर बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. कई किसानों ने इसे बेचकर जमीन तक खरीद ली है. इस योजना से राज्य के 3 लाख 58 हजार से ज्यादा किसानों को लाभ हो रहा है. किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है.
दुर्ग जिले की इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है. लोग अपने मवेशियों की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद है. कुछ लोगों का कहना है कि लकड़बग्घे के हमले से भेड़ों की मौत हो सकती है. लेकिन कुछ लोग इस थ्योरी को नकार रहे हैं और जांच की मांग कर रहे हैं.
देशी में अंडों की बहुत मांग है. इसे देखते हुए बीते कुछ दशकों में अंडों के बाजार ने रिकॉर्ड स्पीड पकड़ी है. लेकिन, अब बाजार में मुर्गियों की नस्लों के आधार पर अंडों की मांग होने लगी है. जिसमें अभी तक सामान्य तौर पर कड़कनाथ मुर्गे के अंडे को सबसे महंंगा माना जाता है. लेकिन, ये सच नहीं है.
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