
उत्तर भारत में मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दो पश्चिमी विक्षोभों के सक्रिय होने से कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है. विभाग के मुताबिक, पहला पश्चिमी विक्षोभ 6 फरवरी से सक्रिय हुआ, जबकि दूसरा और अधिक ज्यादा असरदार सिस्टम 8 फरवरी की रात से सक्रिय होकर 9 से 11 फरवरी के बीच व्यापक असर डालेगा. इस दौरान पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी, जबकि मैदानी इलाकों में घना से बहुत घना कोहरा और तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सुबह और रात के समय घने कोहरे को लेकर विशेष चेतावनी जारी की गई है.
बीते 24 घंटों में उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में तापमान 0 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा. हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तर राजस्थान में न्यूनतम तापमान 5 से 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक बढ़ोतरी संभव है. पूर्वी भारत में अगले 24 घंटों में तापमान 2 से 3 डिग्री तक गिर सकता है.
दिल्ली-एनसीआर में आज आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा, लेकिन दिन के समय 15 से 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी. सुबह के समय हल्की धुंध और रात में कोहरे की संभावना है. वहीं, अधिकतम तापमान 23 से 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान 9 से 11 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है.
इसके अलावा 8 फरवरी को आंशिक बादल छा सकते हैं, जबकि 9 फरवरी की सुबह हल्के से मध्यम कोहरे के आसार हैं. हालांकि, कड़ाके की ठंड से थोड़ी राहत मिल सकती है.
6 फरवरी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है. 9 से 11 फरवरी के बीच जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश और बर्फबारी का दायरा बढ़ेगा.
10 फरवरी को इन इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी है. पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा में घना से बहुत घना कोहरा देखने को मिल सकता है.
मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि पहाड़ी और मैदानी इलाकों में नमी और ठंड को देखते हुए फसलों की सिंचाई फिलहाल टालें. बर्फबारी और बारिश वाले क्षेत्रों में खड़ी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए उचित जल निकासी का इंतजाम करें. पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे पशुओं को ठंड और कोहरे से बचाने के लिए सुरक्षित और ढके हुए स्थानों में रखें. सुबह और रात के समय पशुओं को खुले में न छोड़ें.