
बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव (लो प्रेशर) के क्षेत्र ने देशभर में मानसून की गतिविधियों को फिर से रफ्तार दे दी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह सिस्टम अगले दो दिनों में और मजबूत होकर उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ेगा, जिसके असर से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर तेज बना रहेगा. 16 और 17 जुलाई के दौरान ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कई जगह भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. वहीं, पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर भारत के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण भी मौसम को प्रभावित कर रहे हैं.
16 जुलाई को देशभर के मौसम की बात करें तो पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में मॉनसून सबसे ज्यादा सक्रिय रहेगा. ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कई स्थानों पर तेज बारिश होने का अनुमान है.
पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और जलभराव का खतरा बना रहेगा. असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक बारिश की संभावना है.
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है. दूसरी ओर गुजरात, महाराष्ट्र के आंतरिक हिस्सों और मराठवाड़ा में छिटपुट बारिश देखने को मिलेगी, जबकि दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां सामान्य से कम रहने के आसार हैं और तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश व रायलसीमा के कुछ हिस्सों में गर्मी और उमस बनी रह सकती है.
इधर, दिल्ली-एनसीआर में 16 जुलाई को लोगों को बारिश से ज्यादा गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है. मौसम विभाग के अनुसार दिनभर आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रहेगा और कहीं-कहीं बहुत हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है. अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 से 29 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है.
17 जुलाई को भी मौसम लगभग ऐसा ही रहेगा और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. हालांकि 18 जुलाई से बादल बढ़ने के साथ तापमान में कुछ गिरावट आने और मौसम के अपेक्षाकृत सुहावना होने के संकेत हैं.
वहीं, खेती-किसानी के लिहाज से जिन इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, वहां किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी गई है ताकि धान, मक्का, दलहन, तिलहन और सब्जियों की फसल में जलभराव से नुकसान न हो.
मौसम साफ होने तक उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई जैसे कृषि कार्य टालना बेहतर रहेगा. जिन क्षेत्रों में तेज हवा और गरज-चमक की संभावना है, वहां कटी हुई फसल और कृषि उपज को सुरक्षित स्थान पर रखें और पशुओं को खुले में छोड़ने से बचें.