महाराष्ट्र में 20 से 22 अप्रैल तक आंधी-तूफान का अलर्ट, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

महाराष्ट्र में 20 से 22 अप्रैल तक आंधी-तूफान का अलर्ट, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट में कहा गया है कि कुछ जगहों पर बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने और कहीं-कहीं ओले गिरने की भी संभावना है. ऐसे में राज्य के कृषि विभाग ने किसानों को इस पूर्वानुमान को देखते हुए एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है.

आंधी-तूफान का अलर्ट (AI- तस्वीर)आंधी-तूफान का अलर्ट (AI- तस्वीर)
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Apr 19, 2026,
  • Updated Apr 19, 2026, 1:45 PM IST

महाराष्ट्र में जारी भीषण गर्मी के बीच फिर एक बार मौसम करवट लेने वाला है. दरअसल, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 20 से 22 अप्रैल के बीच महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ आंधी-तूफान का अनुमान लगाया है, जिसके चलते सरकार ने किसानों से अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए अहम कदम उठाने का आग्रह किया है. मौसम विभाग ने बताया कि पश्चिमी महाराष्ट्र, खासकर घाट वाले इलाकों के साथ-साथ खानदेश, मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के कुछ हिस्सों में इस दौरान दोपहर के समय बादल छाए रहने और आंधी-तूफान आने की संभावना है.

आज भी कई इलाकों में ओले गिरने की संभावना

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट में कहा गया है कि कुछ जगहों पर बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने और कहीं-कहीं ओले गिरने की भी संभावना है. प्रेस नोट में कहा गया है कि 19 अप्रैल को भी पश्चिमी महाराष्ट्र के घाट वाले इलाकों के साथ-साथ उत्तरी खानदेश और दक्षिणी मराठवाड़ा के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह का मौसम रहने की उम्मीद है.

20 और 21 अप्रैल को भारी बारिश की संभावना

IMD के हवाले से जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि बारिश का दायरा और तीव्रता 20 और 21 अप्रैल को बढ़ने की संभावना है, जिसमें पुणे संभाग, दक्षिणी मराठवाड़ा (छत्रपति संभाजीनगर संभाग सहित) और विदर्भ के इलाके, खासकर अमरावती संभाग शामिल होंगें. इसमें आगे कहा गया है कि 22 अप्रैल तक आंधी-तूफान की तीव्रता और इसका दायरा धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है.

कृषि विभाग ने दी किसानों को सतर्क रहने की सलाह

ऐसे में राज्य के कृषि विभाग ने किसानों को इस पूर्वानुमान को देखते हुए एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है. अधिकारियों ने बताया है कि किसानों से मौसम की स्थिति के अनुसार अपनी कृषि गतिविधियों की योजना बनाने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि कटी हुई फसलें सुरक्षित और ढकी हुई जगहों पर रखी जाएं. उन्हें तेज हवाओं, बारिश और संभावित ओलावृष्टि से अपनी उपज को होने वाले नुकसान से बचाने और कटी हुई फसलों और सब्जियों को खुले में न छोड़ने की भी सलाह दी गई है. (PTI)

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