
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के श्रीलंका पहुंचने के बावजूद भारत में इसकी एंट्री में देरी के संकेत मिल रहे हैं. श्रीलंका के मौसम विभाग ने बुधवार को मॉनसून के आगमन की पुष्टि की, हालांकि यह सामान्य समय से करीब छह दिन देरी से पहुंचा है. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आमतौर पर श्रीलंका से केरल तक मॉनसून पहुंचने में करीब एक सप्ताह का समय लगता है. ऐसे में केरल में भी इसके आगमन में देरी की संभावना बढ़ गई है.
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले अनुमान लगाया था कि मॉनसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन तय तारीख गुजरने के बाद भी यह तट तक नहीं पहुंच सका है. हालांकि, विभाग के मुताबिक मॉनसून दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, लक्षद्वीप क्षेत्र और बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ चुका है.
मौसम विभाग के अनुसार, केरल के तट पर निचले स्तर की दक्षिण-पश्चिमी हवाएं धीरे-धीरे मजबूत हो रही हैं, लेकिन ऊपरी स्तर की हवाएं अभी अनुकूल दिशा में नहीं बह रही हैं. यही कारण है कि मॉनसून को एक्टिव होने में देरी हो रही है.
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 2 से 3 जून के बीच स्थितियां और अधिक अनुकूल हो सकती हैं. इस दौरान हवाएं मजबूत होने की उम्मीद है, जिसके बाद मॉनसून कभी भी केरल में दस्तक दे सकता है.
आमतौर पर मॉनसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है, जो भारत में बारिश के मौसम की शुरुआत मानी जाती है. पिछले साल यह 24 मई को ही केरल पहुंच गया था, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी है.
भारत में सालभर की कुल बारिश का 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा मॉनसून के दौरान ही होता है. यही कारण है कि खेती, पीने के पानी, पनबिजली उत्पादन और जमीन के नीचे पानी रिचार्ज होने के लिए इसका समय पर पहुंचना बेहद जरूरी होता है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मॉनसून की प्रगति पर करीबी नजर रखी जा रही है और जल्द ही इसके केरल तट तक पहुंचने की उम्मीद है.