तूफान से ओडिशा-आंध्र में भारी बारिश, 8 हजार लोग सुरक्षित जगह भेजे गए, कई इलाकों में बाढ़

तूफान से ओडिशा-आंध्र में भारी बारिश, 8 हजार लोग सुरक्षित जगह भेजे गए, कई इलाकों में बाढ़

आंध्र प्रदेश के ऊपर बने डीप डिप्रेशन के असर से ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गंजाम, गजपति, मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा और नबरंगपुर समेत कई इलाकों में जलभराव, भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना हुआ है. ओडिशा सरकार ने 8,082 लोगों को संवेदनशील इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है. नबरंगपुर के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कई अन्य जिले ऑरेंज और येलो अलर्ट पर हैं. उधर आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में येलेरू के बाढ़ के पानी से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और कई खेत पानी में डूब गए हैं.

Odisha Heavy RainOdisha Heavy Rain
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Sep 25, 2026,
  • Updated Sep 25, 2026, 1:13 PM IST

आंध्र प्रदेश में 'डीप डिप्रेशन' (गहरे कम दबाव के क्षेत्र) के कारण ओडिशा के कुछ हिस्सों में गुरुवार  भारी बारिश हुई. इसके चलते राज्य सरकार ने निचले और भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने का काम शुरू किया. 

भारी बारिश के कारण दक्षिणी जिलों में बाढ़ और भूस्खलन के डर को देखते हुए, राज्य सरकार ने स्थिति से निपटने के इंतजामों की देखरेख के लिए दो वरिष्ठ मंत्रियों - रबी नारायण नाइक (पंचायती राज) और गोकुलानंद मल्लिक (मत्स्य पालन) - को क्रमशः कोरापुट और गजपति जिलों में भेजा.

दक्षिणी जिलों से और बारिश और जलभराव की खबरें मिलने के बाद, राज्य सरकार ने दो और मंत्रियों - विभूति भूषण जेना (परिवहन) और नित्यानंद गोंड (स्कूल और जन शिक्षा) - को क्रमशः गंजाम और नबरंगपुर जिलों का दौरा करने के लिए कहा.

ओडिशा में भारी बारिश से हालात खराब

राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि जेना गुरुवार शाम को गंजाम पहुंचेंगे, जबकि गोंड विधानसभा में 'प्रश्नकाल' में शामिल होने के बाद शुक्रवार को नबरंगपुर के लिए रवाना होंगे.

पुजारी ने कहा कि राहत कार्यों की निगरानी और नुकसान का आकलन करने के लिए चार वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रभावित जिलों में भेजा गया है.

उन्होंने कहा कि 'डीप डिप्रेशन' के कारण हो रही बारिश से छह जिले प्रभावित हुए हैं - गंजाम, गजपति, मलकानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा और नबरंगपुर.

पुजारी ने कहा कि सत्ताधारी बीजेपी ने भी उन पार्टी विधायकों से अपने-अपने इलाकों का दौरा करने और स्थानीय प्रशासन की मदद करने को कहा है, जिनके निर्वाचन क्षेत्रों को संवेदनशील (खतरे वाले) इलाकों के तौर पर पहचाना गया है.

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के "किसी की जान न जाए" (ज़ीरो कैज़ुअल्टी) के निर्देश को ध्यान में रखते हुए पुजारी ने कहा, "हमने गुरुवार दोपहर तक 8,082 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया है और यह प्रक्रिया जारी है. जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि वे जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों से लोगों को दूसरी जगहों पर भेजें."

स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए पुजारी ने कहा कि प्रभावित जिलों से पेड़ उखड़ने, भूस्खलन, जलभराव, सड़कें बंद होने और सड़कों पर बारिश का पानी बहने की खबरें मिली हैं. उन्होंने कहा कि अभी तक किसी के घायल होने या जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है.

डीप डिप्रेशन से भारी बारिश की संभावना

इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि बारिश की तीव्रता बढ़ेगी क्योंकि इस सिस्टम के शाम तक कोरापुट के पास ओडिशा में प्रवेश करने की संभावना है. विभाग ने कहा कि अगले दो दिनों तक भारी बारिश जारी रहेगी.

IMD के अनुसार, 'डीप डिप्रेशन' (गहरा कम दबाव का क्षेत्र) एक ऐसा मौसम सिस्टम है जो 'डिप्रेशन' (कम दबाव का क्षेत्र) से अधिक तीव्र होता है, लेकिन चक्रवाती तूफान से कमजोर होता है.

IMD सूत्रों ने बताया कि गुरुवार सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों में राज्य में औसतन 70 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिसमें कोरापुट जिले के सेमिलीगुडा में सबसे ज्यादा 193.9 मिमी बारिश हुई.

उन्होंने बताया कि राज्य भर में कम से कम 17 जगहों पर 100 मिमी से अधिक बारिश हुई.

मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी करते हुए अधिकारियों से "कार्रवाई करने" को कहा और नबरंगपुर जिले में 20 सेमी से अधिक बारिश का अनुमान जताया.

छह अन्य जिलों -- बरगढ़, नुआपाडा, बोलांगीर, कालाहांडी, कोरापुट और मलकानगिरी -- को ऑरेंज अलर्ट पर रखा गया है, जहां अगले 24 घंटों में 12-20 सेमी भारी बारिश का अनुमान है.

नौ अन्य जिलों -- बालासोर, संबलपुर, झारसुगुडा, क्योंझर, मयूरभंज, सुबर्णपुर, बौध, कंधमाल और रायगडा -- के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां 7-11 सेमी बारिश की संभावना है.

जल संसाधन विभाग ने एक बयान में कहा कि भारी बारिश को देखते हुए अधिकारियों ने राज्य भर में अहम जगहों पर रात की गश्त और जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ा दी है.

विभाग ने कहा कि इंजीनियरिंग अधिकारी और जमीनी कर्मचारी पानी से जुड़े अहम बुनियादी ढांचों पर कड़ी नजर रख रहे हैं और बालासोर जिले की जलका और बुधाबलंग नदियों में जलस्तर बढ़ रहा है.

तटीय इलाकों में तूफानी रहेगा मौसम

IMD ने कहा कि तटीय इलाकों में तूफानी मौसम रहेगा और हवा की गति 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. साथ ही मछुआरों को शुक्रवार सुबह तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है. इस बीच, मलकानगिरी से आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि नेशनल हाईवे 326 पर बने चार निचले पुलों - पोटेरू, कंगुरुकोंडा, कन्याश्रम और MV-90 - के ऊपर से 4-5 फीट बारिश का पानी बह रहा था.

रिपोर्ट के मुताबिक, इसके चलते मलकानगिरी-मोटू नेशनल हाईवे पर गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह से बंद हो गई है.

कालिमेला, मोटू और पाडिया ब्लॉक से संपर्क भी टूट गया, जबकि पुलों के दोनों तरफ सैकड़ों गाड़ियां फंसी हुई थीं.

अधिकारियों ने बताया कि मलकानगिरी-छत्तीसगढ़ रोड पर बना पुल भी पानी में डूब गया. उन्होंने बताया कि बलिमेला, सतीगुडा और जलापुट जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ गया.

अधिकारियों ने बताया कि ऊपरी नाले में पानी के तेज बहाव और भूस्खलन के खतरे के कारण बलिमेला-चित्रकोंडा घाट रोड को बंद कर दिया गया था.

आदिवासी बहुल कोरापुट में भी पिछले 24 घंटों में भारी बारिश हुई. हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि जिले में किसी के हताहत होने, घायल होने या ट्रैफिक में बड़ी रुकावट की कोई खबर नहीं है.

बोरीगुम्मा, नारायणपटना और पोटांगी इलाकों में कई जगहों पर सड़क किनारे लगे पेड़ उखड़ गए, जिन्हें हटाने के काम में फायर ब्रिगेड के कर्मचारी और ODRAF की टीमें लगी हुई थीं.

आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में बाढ़

येलेरू नहर में बाढ़ का पानी बढ़ने से काकीनाडा जिले के कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है और लोगों में चिंता बढ़ गई है.

येलेरू के बाढ़ का पानी पेड्डापुरम-वडलामुरु सड़क पर भर गया है, जिससे गाड़ी चलाने वालों और पैदल चलने वालों को आने-जाने में मुश्किल हो रही है. सड़क पर बने गड्ढे पानी में डूब गए हैं और सड़क की सतह साफ दिखाई नहीं दे रही है, जिससे हालात और भी खतरनाक हो गए हैं.

समरलाकोटा में उप्पुव्वारी सतरम के पास TIDCO हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में भी बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे कॉलोनी के लोगों में घबराहट फैल गई है.

इस बीच, येलेरू में बाढ़ का बहाव बढ़ने से समरलाकोटा-पिथापुरम सड़क पर भारी मात्रा में पानी बह रहा है. पानी भरने से इलाके में ट्रैफिक पर बुरा असर पड़ा है.

कई खेत भी पानी में डूब गए हैं, जिससे किसानों को फसल खराब होने की चिंता सता रही है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी का स्तर बढ़ने के बावजूद प्रभावित इलाकों में कोई चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं.

उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि वे तुरंत चेतावनी के संकेत लगाएं, ट्रैफिक को नियंत्रित करें और बाढ़ प्रभावित इलाकों में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाएं.

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