अकोला में गर्मी का कहर: 40 डिग्री पहुंचा पारा,  जानें क्या है बढ़ते तापमान का कारण?

अकोला में गर्मी का कहर: 40 डिग्री पहुंचा पारा,  जानें क्या है बढ़ते तापमान का कारण?

महाराष्ट्र के अकोला में गर्मी का सितम जारी है. मार्च महीने में ही पारा 40 डिग्री पहुंच गया है. हालात ऐसे हैं कि मार्च के पहले ही सप्ताह में लोगों को अप्रैल और मई जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है. आइए जानते हैं क्या है इसका कारण.

अकोला में गर्मी का कहरअकोला में गर्मी का कहर
धनंजय साबले
  • Akola,
  • Mar 11, 2026,
  • Updated Mar 11, 2026, 12:17 PM IST

महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित अकोला में इस वर्ष मार्च महीने की शुरुआत से ही तेज धूप और बढ़ते तापमान ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हालात ऐसे हैं कि मार्च के पहले ही सप्ताह में लोगों को अप्रैल और मई जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है. तेज धूप के कारण दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो गई है और लोग गर्मी से बचने के लिए अलग-अलग उपाय करते नजर आ रहे हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के पहले दस दिनों में अकोला का तापमान लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है.

पिछले 10 दिनों में इतना बढ़ा तापमान

  • 1 मार्च को तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था.
  • 2 मार्च को यह बढ़कर 38.5 डिग्री हो गया.
  • 3 मार्च को 38.6 डिग्री,
  • 4 मार्च को 39.3 डिग्री,
  • 5 मार्च को 39.5 डिग्री,
  • 6 मार्च को 40.7 डिग्री,
  • 7 मार्च को 40.8 डिग्री,
  • 8 मार्च को 40.9 डिग्री,
  • 9 मार्च को 40.4 डिग्री और
  • 10 मार्च को फिर से 40.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया.

इन आंकड़ों से साफ दिखाई देता है कि मार्च के शुरुआती दिनों में ही अकोला का तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है. खास बात यह है कि 2 मार्च और 8 मार्च को अकोला का तापमान पूरे देश में सबसे अधिक दर्ज किया गया था. यह स्थिति इस क्षेत्र में तेजी से बढ़ती गर्मी का संकेत दे रही है.

क्या है बढ़ते तापमान का कारण?

अकोला विदर्भ के उन इलाकों में गिना जाता है, जहां गर्मी सामान्य रूप से फरवरी के अंत से ही शुरू हो जाती है, लेकिन इस बार तापमान में हो रही असामान्य वृद्धि ने वैज्ञानिकों का भी ध्यान आकर्षित किया है. बढ़ते तापमान के पीछे के कारणों को समझने के लिए 'GNT' की टीम ने अकोला स्थित डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों से बातचीत की.

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद तुपे ने बताया कि अकोला में तापमान बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं. सबसे बड़ा कारण शहर और जिले में तेजी से हो रही पेड़ों की कटाई और हरित क्षेत्र में कमी है. पेड़-पौधे वातावरण का तापमान नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनकी संख्या कम होने से गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस होने लगता है.

धूल भी गर्मी बढ़ने का बड़ा कारण

इसके अलावा जमीन में पानी का पर्याप्त भंडारण न होना भी तापमान बढ़ने की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. पहले शहर और गांवों के आसपास तालाब, कुएं और जलस्रोत बड़ी संख्या में होते थे, जिससे जमीन में नमी बनी रहती थी और तापमान नियंत्रित रहता था. लेकिन अब इन जलस्रोतों की संख्या कम हो गई है, जिससे वातावरण अधिक गर्म हो रहा है.

वैज्ञानिकों के अनुसार अकोला शहर में बढ़ती धूल भी गर्मी बढ़ने का एक कारण बन रही है. सूरज की किरणें जब जमीन पर गिरती हैं तो सामान्य स्थिति में वे वापस वातावरण में परावर्तित हो जाती हैं, लेकिन धूल की परत के कारण यह प्रक्रिया प्रभावित होती है. धूल इन किरणों को अपने भीतर रोक लेती है, जिससे जमीन की सतह ज्यादा गर्म हो जाती है और तापमान बढ़ने लगता है.

शहर और गांवों में तेजी से बढ़ते सीमेंट-कंक्रीट के रास्ते और इमारतें भी तापमान बढ़ाने में भूमिका निभा रही हैं. कंक्रीट की सतह सूरज की गर्मी को अधिक देर तक अपने भीतर बनाए रखती है, जिससे आसपास का वातावरण भी गर्म हो जाता है. इसके साथ ही जंगलों की कटाई और नए पेड़ों का पर्याप्त रोपण न होना भी स्थिति को और गंभीर बना रहा है.

तालाब और छोटे बांध बनाने से कम होगी गर्मी

डॉ. तुपे के अनुसार घरों और वाहनों में बढ़ते एयर कंडीशनर के इस्तेमाल से निकलने वाली गर्म हवा भी वातावरण में गर्मी बढ़ाने में अप्रत्यक्ष रूप से योगदान देती है. शहरों में एसी की संख्या लगातार बढ़ रही है और इससे निकलने वाली गर्म हवा आसपास के तापमान को और बढ़ा देती है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जमीन में पानी का भंडारण बढ़ाया जाए, तालाब और छोटे बांध बनाए जाएं और बारिश के पानी को रोककर खेतों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाए, तो तापमान को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. खेतों में सिंचित खेती होने से जमीन में नमी बनी रहती है, जिससे आसपास का तापमान भी कम हो सकता है.

मार्च की गर्मी से बेहाल हैं अकोला के लोग

इधर भीषण गर्मी के चलते अकोला में लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हो रही है. दोपहर के समय लोग कम ही घरों से बाहर निकल रहे हैं, जो लोग बाहर निकलते हैं वे गर्मी से राहत पाने के लिए गन्ने का रस, नींबू शरबत, ठंडा पानी और कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा ले रहे हैं. इसके साथ ही लोग सनग्लासेस, टोपी और सफेद कपड़े या दुपट्टे से सिर और चेहरे को ढक कर धूप से बचने की कोशिश कर रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि मार्च के महीने में ही जब इतनी तेज गर्मी महसूस हो रही है, तो अप्रैल और मई में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है.

वहीं, अकोला के स्थानिक नागरिक डॉ राजकुमार चव्हाण ने बताया कि लगातार बढ़ता तापमान न केवल लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है, बल्कि यह पर्यावरण और भविष्य के मौसम चक्र के लिए भी एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है. 

MORE NEWS

Read more!