
दुनिया के बड़े जलवायु मॉडल, जिनमें ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग (BoM) के मॉडल भी शामिल हैं, यह संकेत दे रहे हैं कि प्रशांत महासागर में लगातार गर्मी बढ़ रही है. इसके चलते मई से जुलाई के बीच अल-नीनो बनने की संभावना जताई जा रही है. कुछ मॉडल कहते हैं कि यह जल्दी शुरू हो सकता है, जबकि कुछ के अनुसार यह धीरे-धीरे विकसित होगा. यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि समुद्र और हवा के बीच तालमेल कैसा रहता है, क्योंकि यही अल-नीनो को मजबूत बनाता है.
अभी ENSO यानी अल-नीनो-दक्षिणी दोलन प्रणाली न्यूट्रल स्थिति में है, लेकिन इसमें गर्मी के साफ संकेत दिखाई दे रहे हैं. 12 अप्रैल तक नीनो3.4 इंडेक्स -0.27°C रहा, जो सामान्य दायरे में है. हालांकि, यह इंडेक्स लगातार बढ़ रहा है, जिससे साफ है कि महासागर की सतह का तापमान धीरे-धीरे ऊपर जा रहा है. हाल के दिनों में समुद्र के अंदर की गर्मी भी बढ़ी है, जिससे आने वाले हफ्तों में सतह और ज्यादा गर्म हो सकती है.
जलवायु संकेत बताते हैं कि इस साल के अंत तक अल-नीनो फिर से सक्रिय हो सकता है. इसके साथ ही दुनिया भर में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है. इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरह से दिखेगा, खासकर बारिश के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है.
कम समय के मौसम संकेत भी इस गर्मी को बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. मैडन-जूलियन ऑस्सिलेशन (MJO) के कारण पश्चिमी प्रशांत में तेज पश्चिमी हवाएं चलने की संभावना है. यह स्थिति आमतौर पर समुद्र के पानी को और गर्म करती है. वहीं, 30 दिन का साउदर्न ऑस्सिलेशन इंडेक्स -7.7 तक गिर गया है, जो बताता है कि प्रशांत क्षेत्र में दबाव के पैटर्न बदल रहे हैं.
ENSO के साथ-साथ हिंद महासागर डाइपोल (IOD) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. फिलहाल IOD न्यूट्रल स्थिति में है और इसका इंडेक्स +0.06°C है. ज्यादातर मॉडल बताते हैं कि यह स्थिति अभी बनी रहेगी, लेकिन सर्दियों और बसंत में इसके पॉजिटिव होने की संभावना बढ़ रही है. अगर ऐसा होता है तो इसका असर भारत के मानसून पर भी पड़ सकता है. हालांकि, इसको लेकर अभी भी काफी अनिश्चितता बनी हुई है.
APEC क्लाइमेट सेंटर के अनुसार, आने वाले महीनों में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा. भारत, इंडोनेशिया, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है. इसका कारण समुद्र की सतह का तापमान ज्यादा होना है, जिससे हवा में नमी बढ़ती है और बारिश के सिस्टम मजबूत होते हैं. कुछ इलाकों में कम बारिश की संभावना भी है, जिससे साफ है कि बारिश का बंटवारा बराबर नहीं रहेगा.
भारत के लिए यह स्थिति काफी अहम हो सकती है. अगर ENSO न्यूट्रल से अल-नीनो की ओर जाता है और साथ ही IOD पॉजिटिव हो जाता है, तो मॉनसून पर बड़ा असर पड़ सकता है. आमतौर पर न्यूट्रल ENSO अच्छे और संतुलित मानसून का संकेत देता है, लेकिन अल-नीनो आने पर बारिश का पैटर्न बदल सकता है. इससे कुछ इलाकों में सूखा और कुछ जगहों पर ज्यादा बारिश जैसी स्थिति बन सकती है.
कुल मिलाकर, दुनिया का मौसम धीरे-धीरे गर्म हो रहा है और अल-नीनो की वापसी की संभावना बढ़ रही है. इससे आने वाले महीनों में मौसम में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. खासकर भारत जैसे देशों के लिए यह समय सतर्क रहने का है, क्योंकि मानसून और खेती पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.
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