चक्रवात का मंडराया खतरा: बंगाल की खाड़ी में बनेगा शक्तिशाली तूफान, IMD के अलर्ट से दक्षिण भारत में बढ़ी चिंता

चक्रवात का मंडराया खतरा: बंगाल की खाड़ी में बनेगा शक्तिशाली तूफान, IMD के अलर्ट से दक्षिण भारत में बढ़ी चिंता

बंगाल की खाड़ी में एक शक्तिशाली चक्रवात बनने की संभावना है, जो सोमवार तक गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है और आंध्र प्रदेश-ओडिशा तट की ओर बढ़ सकता है. वहीं, अरब सागर में बने कम दबाव के क्षेत्र और उत्तर-पूर्वी मॉनसून के सक्रिय होने से दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी बारिश के आसार हैं. IMD के अनुसार, अक्टूबर में तमिलनाडु और कर्नाटक के कई हिस्सों में बारिश की कमी में सुधार हुआ है.

Cyclone Arnab El-nino Cyclone Arnab El-nino
क‍िसान तक
  • नई दिल्ली,
  • Oct 23, 2026,
  • Updated Oct 23, 2026, 4:11 PM IST

बंगाल की खाड़ी में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है और एक शक्तिशाली चक्रवात के उभरने के पूरे आसार बन गए हैं. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पूर्व और उससे सटे मध्य-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का एक नया क्षेत्र बना है, जो सोमवार तक चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है.

चक्रवात का संभावित सफर और तीव्रता

यह वेदर सिस्टम लगातार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है. अनुमान है कि यह रविवार तक 'गहरे दबाव' (deep depression) में और सोमवार सुबह तक मध्य-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती तूफान में तब्दील हो जाएगा. वैश्विक मौसम मॉडलों का मानना है कि इसके बाद यह और अधिक मजबूत होकर एक 'गंभीर चक्रवाती तूफान' (severe cyclonic storm) का रूप ले सकता है और अंततः उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों की ओर बढ़ सकता है.

अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के सिस्टम में टकराव या मेल?

इस बीच, दक्षिण केरल तट के पास दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में भी एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. मौसम विशेषज्ञों के शुरुआती अनुमान थे कि दोनों सिस्टम एक-दूसरे को ताकत दे सकते हैं, जिससे बंगाल की खाड़ी का सिस्टम आंध्र-ओडिशा की ओर बढ़ेगा और अरब सागर का सिस्टम गोवा की तरफ रुख करेगा.

हालांकि, IMD का अनुमान इससे कुछ अलग है. दक्षिण-पश्चिम से आने वाली तेज हवाएं अरब सागर के कम दबाव वाले क्षेत्र को वापस दक्षिणी प्रायद्वीप के पार दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी (दक्षिण तमिलनाडु और उत्तरी श्रीलंका के पास) की ओर धकेल सकती हैं.

इसके बाद यह बंगाल की खाड़ी के चक्रवात के साथ मिल सकता है, जिससे अगले हफ्ते उत्तर-पूर्वी मॉनसून (north-east monsoon) और अधिक जोरदार हो जाएगा और दक्षिणी प्रायद्वीप में बारिश का दौर लगातार जारी रहेगा.

तमिलनाडु और कर्नाटक में बारिश से राहत

इस मौसमी हलचल का सबसे बड़ा फायदा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल को मिल रहा है. जून से सितंबर के दौरान सूखे जैसी स्थिति झेलने वाले इस क्षेत्र में अक्टूबर में जबरदस्त सुधार हुआ है. 1 से 21 अक्टूबर के बीच यहां सामान्य से 23 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, और 15 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी मॉनसून की शुरुआत के बाद यह अतिरिक्त बारिश बढ़कर 109.3 प्रतिशत तक पहुंच गई. IMD ने 22 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच यहां सामान्य या उससे अधिक बारिश की संभावना जताई है.

कर्नाटक के तटीय और दक्षिणी आंतरिक हिस्सों में भी स्थिति सुधर रही है. तटीय कर्नाटक में जहां पहले 33 प्रतिशत की कमी थी, वहीं हालिया हफ्तों में 83 प्रतिशत अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई है. दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी बारिश का घाटा मुनाफे में बदल गया है और 58 प्रतिशत अतिरिक्त बारिश रिकॉर्ड हुई है. हालांकि, लक्षद्वीप में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां बारिश की कमी बढ़कर 72 प्रतिशत हो गई है, जबकि केरल और माहे में स्थिति लगभग सामान्य के करीब पहुंच गई है.

आगे की चुनौतियां और चिंताएं

बंगाल की खाड़ी में गंभीर चक्रवात और अरब सागर से आ रहे सिस्टम के अलावा, अगले हफ्ते एक तीसरे सिस्टम के बनने की भी संभावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह उत्तर-पूर्वी मॉनसून के लिए बहुत फायदेमंद है, लेकिन मुख्य चिंता यह है कि कहीं चक्रवात की विनाशकारी हवाएं और एक ही जगह पर केंद्रित मूसलाधार बारिश, व्यापक और सकारात्मक बारिश के फायदों पर भारी न पड़ जाए. प्रशासन और मौसम विभाग इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए हैं.

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