'सिर्फ कागजी योजनाएं नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए कार्रवाई'- पराली और प्रदूषण पर CAQM सख्त

'सिर्फ कागजी योजनाएं नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए कार्रवाई'- पराली और प्रदूषण पर CAQM सख्त

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा सरकारों को जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. चंडीगढ़ में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के साथ-साथ वाहनों के धुएं, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक प्रदूषण पर भी कड़ी नजर रखने को कहा गया है.

आशुतोष मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • Oct 23, 2026,
  • Updated Oct 23, 2026, 11:14 AM IST

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के इलाकों में हर साल सर्दियों के मौसम में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने कमर कस ली है. आयोग ने पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ समीक्षा बैठक कर पराली जलाने की रोकथाम और प्रदूषण के अन्य प्रमुख स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई करने के कड़े निर्देश दिए हैं. आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में दोनों राज्यों के अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें आयोजित की गईं.

पराली प्रबंधन और मशीनों के उपयोग पर जोर

पंजाब में हुई बैठक के दौरान धान के अवशेष (पराली) प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनों की संख्या, उनकी तैनाती और किसानों द्वारा उनके इस्तेमाल की समीक्षा की गई. आयोग ने स्पष्ट किया कि केवल कागजी योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसे प्रभावी तरीके से लागू करने की मंशा जमीनी स्तर पर दिखनी चाहिए.

पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए उपग्रह (सैटेलाइट) आधारित अलर्ट, ड्रोन और कम लागत वाले सेंसरों के इस्तेमाल की समीक्षा की गई.

ईंट भट्ठों में पराली से बने बायोमास पेलेट्स और ब्रिकेट्स के उपयोग और थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास को जलाने (को-फायरिंग) के लक्ष्यों का आकलन किया गया.

वाहनों और धूल से फैलने वाले प्रदूषण पर भी नजर

हरियाणा के साथ हुई बैठक में पराली के अलावा वाहनों, सड़कों, खुले क्षेत्रों, निर्माण कार्यों और औद्योगिक इकाइयों से फैलने वाले प्रदूषण पर भी विस्तार से चर्चा हुई.

ईंधन और सीएनजी स्टेशनों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) प्रणाली के जरिए वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUCC) की जांच करने के निर्देश दिए गए.

तय आयु पूरी कर चुके पुराने वाहनों पर कार्रवाई और डीजल ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रगति की समीक्षा की गई.

सड़कों की मशीनों से सफाई, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय और उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन करने पर जोर दिया गया.

लापरवाही बरतने पर होगी सख्त कार्रवाई

CAQM ने दोनों राज्यों को समयबद्ध तरीके से कार्ययोजनाएं लागू करने, जिला प्रशासन और विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने की हिदायत दी है. आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि लापरवाही के कारण पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी होती है, तो इसे बेहद गंभीरता से लिया जाएगा. साथ ही, पराली को केवल प्रदूषण की समस्या मानने के बजाय इसे बायोमास उद्योगों के जरिए एक उपयोगी संसाधन के रूप में विकसित करने की बात कही गई है, ताकि किसानों को भी लाभ मिल सके.

MORE NEWS

Read more!