
मॉनसून की शुरुआत के साथ ही मौसम विभाग द्वारा आए दिन बारिश को लेकर कभी येलो, कभी ग्रीन, कभी रेड तो कभी ऑरेंज अलर्ट जारी किया जाता है. लेकिन क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की है कि इन अलर्ट का क्या मतलब होता है और मौसम विभाग की ओर से जारी किए जाने वाले इन अलर्ट में कितने मिलीमीटर (मि.मी.) तक बारिश होती है और उस दौरान कैसी स्थिति रहती है. इन तमाम विषयों को लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के कार्यकारी निदेशक डॉ. आशुतोष उपाध्याय जानकारी देते हुए कहते हैं कि मौसम विभाग की ओर से जारी विभिन्न अलर्ट के अपने अलग-अलग मायने होते हैं.
कार्यकारी निदेशक डॉ. आशुतोष उपाध्याय बताते हैं कि मौसम विभाग की ओर से बारिश को लेकर अगर ग्रीन अलर्ट जारी किया जाता है तो इस दौरान मौसम सामान्य रहता है. बारिश काफी धीमी-धीमी होती है. इस दौरान बारिश की वजह से बहुत ज्यादा नुकसान की संभावना नहीं रहती है. वहीं, कृषि पर किसी तरह का विशेष असर देखने को नहीं मिलता है. ग्रीन अलर्ट में सामान्य स्थिति में 24 घंटे के दौरान बरसात 64.4 मि.मी. से कम रहने का अनुमान रहता है.
आईसीएआर के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के कार्यकारी निदेशक कहते हैं कि बारिश को लेकर ग्रीन अलर्ट के दौरान किसानों को बहुत ज्यादा सचेत रहने की जरूरत नहीं होती है. वहीं, अगर मौसम विभाग की ओर से येलो अलर्ट जारी किया जाता है तो इस दौरान किसानों से लेकर आम आदमी को सजग रहने की जरूरत होती है. इस अलर्ट में 24 घंटों में बरसात 64.5-115.5 मिलीमीटर तक हो सकती है. इस दौरान बारिश होने की संभावना रहती है. खेती में बहुत ज्यादा नुकसान की संभावना नहीं रहती है.
कार्यकारी निदेशक डॉ. आशुतोष उपाध्याय के अनुसार, मौसम विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) जारी किया जाता है तो इस दौरान 24 घंटे के अंदर भारी बारिश होने की संभावना रहती है, जिसमें बरसात 115.6–204.4 मिली मीटर के बीच हो सकती है. आगे उन्होंने बताया कि इस दौरान सभी को अधिक समय घर पर ही गुजारना चाहिए. अगर बहुत जरूरी काम हो, तभी घर से बाहर जाना चाहिए.
वहीं, जब मौसम विभाग की ओर से रेड अलर्ट जारी किया जाता है तो 24 घंटों के दौरान भारी तबाही की आशंका बनी रहती है. इस दौरान बरसात 204.5 मि.मी. से अधिक होने का पूर्वानुमान रहता है. रेड अलर्ट में बिजली गिरने की भी संभावना अधिक रहती है.
मौसम विभाग की ओर से जिन इलाकों में रेड अलर्ट जारी किया जाता है, उन इलाकों के लोगों को 24 घंटे के दौरान काफी सतर्क रहने की जरूरत होती है, क्योंकि इस दौरान प्रकृति का उग्र प्रकोप देखने को मिल सकता है. हो सके तो इस समयावधि के दौरान यात्रा करने से बचना चाहिए.