
जनवरी महीना अपनी समाप्ति की ओर है और इसके साथ ही ठंड का असर भी धीरे-धीरे अब कम होता जा रहा है. हालांकि महीने के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर मौसम में बदलाव देखने को मिला है, जहां मौसम वैज्ञानिकों द्वारा बुधवार को राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. वहीं ठंड के घटते प्रभाव और सूर्य की तीखी धूप को देखते हुए रबी फसल की खेती को लेकर भोजपुर कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व हेड सह कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार द्विवेदी कहते हैं कि यह बारिश अगर हल्की होती है तो सभी फसलों के लिए वरदान है. वहीं अगर बारिश में रफ्तार तेज होती है तो सभी रबी फसलों के लिए नुकसानदेह है.
मौसम विज्ञान केंद्र पटना के वैज्ञानिक आशीष कुमार 'किसान तक' से बातचीत में बताते हैं कि आज यानी बुधवार को राज्य के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सिवान जिलों के एक या दो स्थानों पर गरज के साथ बिजली गिरने और तेज हवाएं (30–40 किमी प्रति घंटे) चलने की संभावना है. वहीं, अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों के अधिकतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना है. उसके बाद अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के अनेक स्थानों के अधिकतम तापमान में 2–4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने का पूर्वानुमान है.
कृषि वैज्ञानिक डॉ. द्विवेदी कहते हैं कि जनवरी के महीने में जिस तरह से तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, इसकी वजह से पछेती गेहूं की खेती पर सीधा असर देखने को मिल रहा है. वहीं वे यह भी कहते हैं कि अगर बारिश होती है तो यह फसल के लिए काफी फायदेमंद रहेगा, लेकिन हाल के समय में जिस तरह का तापमान देखने को मिल रहा है, वह किसी भी तरह से गेहूं के लिए फायदेमंद नहीं है. जनवरी से फरवरी के बीच गेहूं के लिए जो बेहतर तापमान होता है, वह 18 से 20 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम और अधिकतम 20 से 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना चाहिए, लेकिन अभी ही तापमान इसके आसपास है या इससे ज्यादा है.
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर हाल के समय में राज्य में बारिश होती है तो वह पूरी तरह से किसानों के हित में है, बशर्ते बारिश बहुत ज्यादा तेज न हो. हल्की से मध्यम बारिश रबी फसलों के लिए एक जीवनदान बनकर आएगी. विशेष तौर पर चना, मसूर और सरसों के लिए यह बारिश फायदेमंद होगी, लेकिन मौसम विभाग द्वारा राज्य के कुछ ही जिलों में बारिश को लेकर संभावनाएं व्यक्त की गई हैं. उन्होंने बताया कि अब बारिश इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार जिस तरह का ओस गिरना चाहिए था, उस तरह का ओस नहीं गिरा है और इसकी वजह से हाल के समय में बारिश बेहद जरूरी है. अगर अच्छी बारिश होती है तो दलहन से लेकर तिलहन और गेहूं के उत्पादन में वृद्धि देखने को मिलेगी.
हालांकि यह बारिश आम के मंजर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है, क्योंकि बसंत पंचमी बीत जाने के बावजूद भी अभी तक आम में मंजर नहीं आए हैं. वहीं अगर बारिश होती है तो यह मंजर को निकलने में काफी प्रभावित करेगा.