
केंद्र सरकार ने "विकसित भारत जी राम जी (VB G RAM G)" योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन जारी किया है. मनरेगा के तहत पहले से आवंटित 30 हजार करोड़ रुपये को जोड़ने पर कुल प्रावधान 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा. सरकार 1 जुलाई 2026 से नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसके जरिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से रोजगार और ग्रामीण विकास कार्यों को गति देने का लक्ष्य रखा गया है. इसी को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी भी मौजूद रहे.
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि करोड़ों मजदूरों की आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा विषय है. उन्होंने राज्यों को निर्देश दिए कि ट्रांजिशन पूरी तरह सुचारू रहे और एक भी मजदूर रोजगार से वंचित न हो. मजदूरी भुगतान, रोजगार उपलब्धता और श्रमिकों के अधिकारों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी.
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह राशि देश की लगभग 2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी और पंचायतों के माध्यम से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा. इसके लिए राज्यों से पर्याप्त संख्या में कार्यों की पूर्व स्वीकृति देने को कहा गया है, ताकि 1 जुलाई से ही कार्यों का क्रियान्वयन तेजी से शुरू हो सके.
बैठक के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अंतरिम आवंटन की घोषणा की गई. उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश को प्रमुख हिस्सेदारी दी गई. राज्यों के लिए कुल 92,550.17 करोड़ रुपये और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 1,291.32 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं. शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों को 28 और 29 जून को नई दिल्ली के पूसा संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया.
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | आवंटन (करोड़ रु.) |
| आंध्र प्रदेश | 7,707.21 |
| अरुणाचल प्रदेश | 560.70 |
| असम | 1,929.24 |
| बिहार | 6,715.83 |
| छत्तीसगढ़ | 3,354.85 |
| गोवा | 3.70 |
| गुजरात | 1,540.54 |
| हरियाणा | 590.23 |
| हिमाचल प्रदेश | 1,201.78 |
| झारखंड | 2,705.64 |
| कर्नाटक | 5,709.09 |
| केरल | 3,136.44 |
| मध्य प्रदेश | 6,252.03 |
| महाराष्ट्र | 4,420.32 |
| मणिपुर | 581.99 |
| मेघालय | 1,155.09 |
| मिजोरम | 611.65 |
| नगालैंड | 287.85 |
| ओडिशा | 3,763.80 |
| पंजाब | 1,331.61 |
| राजस्थान | 7,581.87 |
| सिक्किम | 97.57 |
| तमिलनाडु | 7,957.57 |
| तेलंगाना | 4,229.74 |
| त्रिपुरा | 1,041.07 |
| उत्तर प्रदेश | 12,221.48 |
| उत्तराखंड | 626.43 |
| पश्चिम बंगाल | 8,508.00 |
| राज्यों को कुल आवंटन | 92,550.17 |
| पुडुचेरी | 40.56 |
| जम्मू-कश्मीर | 1,151.02 |
| अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह | 4.44 |
| लद्दाख | 85.98 |
| दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव | 9.02 |
| लक्षद्वीप | 0.32 |
| केंद्र शासित प्रदेश कुल | 1,291.32 |
| केंद्रीय प्रशासन और सोशल ऑडिट | 1,850.62 |
| कुल अंतरिम आवंटन | 95,692.31 |
बैठक में डीबीटी, एसएमएस सूचना प्रणाली, ई-केवाईसी और फेस ऑथेंटिकेशन की तैयारियों की समीक्षा भी की गई. कई राज्यों ने इन प्रक्रियाओं में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है. उन्होंने बताया कि 26 राज्यों ने अपने बजट में आवश्यक वित्तीय प्रावधान कर लिए हैं जबकि झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम से जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया गया है. राज्यों को अधिसूचना जारी करने, 100 प्रतिशत ई-केवाईसी सुनिश्चित करने और जिला व ब्लॉक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने के निर्देश भी दिए गए.