गांवों में रोजगार के साथ पानी और खेती पर जोर, नई योजना में 375 काम शामिल

गांवों में रोजगार के साथ पानी और खेती पर जोर, नई योजना में 375 काम शामिल

केंद्र सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था के तहत 375 तरह के कामों को मंजूरी दी है. इसमें पानी की सुरक्षा, खेती, ग्रामीण सुविधाओं, आजीविका और आपदा से बचाव पर जोर दिया गया है. योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी मिलेगी. काम गांव की जरूरत के अनुसार ग्राम सभा की मंजूरी से तय किए जाएंगे.

ग्रामीण रोजगार योजना का बदला ढांचाग्रामीण रोजगार योजना का बदला ढांचा
क‍िसान तक
  • New Delhi,
  • Oct 06, 2026,
  • Updated Oct 06, 2026, 4:07 PM IST

केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार के नए ढांचे के तहत 375 तरह के कामों को मंजूरी दी है. इन कामों का मुख्य फोकस गांवों में रोजगार के साथ-साथ पानी की सुरक्षा, खेती, ग्रामीण सुविधाओं और आपदा से बचाव के लिए जरूरी ढांचा तैयार करना है. नए ढांचे में पहले की योजना के मुकाबले कामों की संख्या करीब 41 फीसदी बढ़ाई गई है.

चार हिस्सों में बांटे गए 375 काम

ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुताबिक, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G) ग्रामीण अधिनियम, 2025 के तहत कामों की नई सूची तैयार की गई है. इन 375 कामों को चार मुख्य हिस्सों में बांटा गया है. इनमें पानी की सुरक्षा, गांव की जरूरी सुविधाएं, आजीविका से जुड़े काम और खराब मौसम या आपदा से बचाव के काम शामिल हैं. कुल 375 कामों में से 128 काम पानी की सुरक्षा से जुड़े हैं. वहीं, 111 काम गांव की बुनियादी सुविधाओं के लिए हैं. आजीविका से जुड़े 98 काम रखे गए हैं, जबकि 38 काम बाढ़, जंगल की आग और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए हैं.

किसानों और खेती पर भी रहेगा जोर

नई व्यवस्था में खेती और उससे जुड़े कामों को भी काफी महत्व दिया गया है. मंत्रालय के अनुसार, 181 काम खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों से संबंधित हैं. इनमें 52 ऐसे काम हैं जिनका सीधा फायदा किसी व्यक्ति को मिल सकता है. नई सूची में खेती के साथ-साथ कृषि उत्पादों को संभालने और बेचने से जुड़ी सुविधाओं को भी शामिल किया गया है. इनमें अनाज की सफाई, ग्रेडिंग और पैकिंग यूनिट, छोटी आटा मिल, मंडी से जुड़ी सुविधाएं, डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर, मशरूम की खेती के लिए शेड और मछली पालन से जुड़ी संरचनाएं शामिल हैं.

पानी बचाने के लिए कई काम शामिल

नई योजना में पानी की सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है. इसके तहत चेक डैम, पानी को जमीन के अंदर पहुंचाने वाले रिचार्ज शाफ्ट, नदियों और पानी की नहरों की सफाई और सुधार जैसे काम किए जा सकेंगे. इसके अलावा जलभराव वाली जमीन को ठीक करने और बारिश के पानी को जमा करने के काम भी इस सूची में शामिल हैं. किसानों के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई जैसी सुविधाओं को भी जगह दी गई है. पानी बचाने के लिए कुछ खास इलाकों में कृत्रिम ग्लेशियर जैसे उपाय भी किए जा सकेंगे.

गांवों में स्वास्थ्य और दूसरी सुविधाएं बढ़ेंगी

नई सूची में गांवों की बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया है. इसके तहत सोलर स्ट्रीट लाइट, कचरे को रिसाइकिल करने वाले प्लांट और गंदे पानी के उपचार की व्यवस्था बनाई जा सकेगी. इसके अलावा गांवों में पुस्तकालय, पशु चिकित्सा केंद्र, ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र और कॉमन सर्विस सेंटर बनाए जा सकेंगे. सरकारी स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाएं और लैब बनाने का काम भी इस योजना में शामिल है. जल जीवन मिशन के तहत बनाए गए पानी की सप्लाई से जुड़े ढांचे की मरम्मत और रखरखाव का काम भी कराया जा सकेगा.

पहली बार आपदा से बचाव के लिए अलग श्रेणी

नए ग्रामीण रोजगार ढांचे में पहली बार खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए अलग श्रेणी बनाई गई है. इसके तहत कुल 38 तरह के काम किए जा सकेंगे. इनमें बाढ़ से बचने के लिए राहत केंद्र बनाना, बांध और तटबंध मजबूत करना, बाढ़ से सुरक्षा के इंतजाम करना और आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों व दूसरी सामुदायिक सुविधाओं की मरम्मत करना शामिल है. जंगल की आग से बचाव के लिए भी कुछ काम किए जा सकेंगे.

महिलाओं और युवाओं के लिए भी काम

नई सूची में स्वयं सहायता समूहों (SHG) को मजबूत करने से जुड़े काम भी शामिल किए गए हैं. इनमें SHG के लिए वर्कशेड और SHE Marts जैसी सुविधाएं बनाने का प्रावधान है. प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्र बनाने का काम भी कराया जा सकेगा. मंत्रालय के अनुसार, 107 काम अंत्योदय और कमजोर परिवारों के लिए रखे गए हैं. इनमें 68 ऐसे काम हैं जिनका सीधा फायदा व्यक्तिगत लाभार्थियों को मिलेगा. इसके अलावा महिलाओं और युवाओं से जुड़े 36-36 काम भी सूची में शामिल किए गए हैं.

गांव की जरूरत के हिसाब से तय होंगे काम

नई व्यवस्था में काम गांव की जरूरत के हिसाब से तय किए जाएंगे. इसके लिए विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (Viksit Gram Panchayat Plans) तैयार की जाएंगी. इन योजनाओं को ग्राम सभा की मंजूरी के बाद लागू किया जाएगा. कामों की निगरानी डिजिटल तरीके से होगी. इसके लिए विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे कामों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने और उनकी प्रगति पर नजर रखने में मदद मिलेगी.

हर ग्रामीण परिवार को 125 दिन के रोजगार की गारंटी

VB-G RAM G अधिनियम 1 जुलाई से लागू हुआ है और इसने मनरेगा की मांग आधारित रोजगार व्यवस्था की जगह नई व्यवस्था शुरू की है. इसके तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को हर साल 125 दिन के रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान है. नई व्यवस्था में ज्यादातर राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच खर्च का अनुपात 60:40 रखा गया है. केंद्र सरकार राज्यों के लिए तय राशि का मानक तय करेगी. तय राशि से ज्यादा खर्च होने पर उसका बोझ राज्यों पर होगा.

योजना में बदलाव को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल

नई व्यवस्था को लेकर विपक्ष ने कई सवाल भी उठाए हैं. विपक्ष ने योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने पर आपत्ति जताई है. इसके अलावा फंडिंग के नए नियम, राज्यों के लिए राशि तय करने की व्यवस्था और खेती के व्यस्त मौसम में काम रोकने के प्रावधान को लेकर भी चिंता जताई गई है. नए नियमों के तहत राज्य खेती के सबसे व्यस्त समय में एक साल में अधिकतम 60 दिनों तक इन कामों को रोक सकते हैं. सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था में ग्रामीण रोजगार के साथ गांवों में स्थायी सुविधाएं और आजीविका के साधन तैयार करने पर ज्यादा जोर दिया गया है. 

ये भी पढ़ें: 

महाराष्‍ट्र सूखा संकट: सरकारी ऐलान के बाद राहत के इंतजार में किसान, पिछले मुआवजे का भी उठाया मुद्दा
बीड में चारा-पानी का संकट, भेड़-बकरियों को लेकर भटक रहे चरवाहे, चारा छावनी खोलने की मांग

MORE NEWS

Read more!