
बिहार में गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर है. राज्य में बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में अब जमीन पर काम शुरू हो गया है. दरभंगा और मधुबनी जिलों के रैयाम और सकरी में सहकारी क्षेत्र के तहत नई चीनी मिलों को शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है. सहकारिता विभाग ने इन दोनों स्थानों पर प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन की अनुमति दे दी है. खास बात यह है कि इन समितियों के सदस्य सीधे तौर पर क्षेत्र के गन्ना उत्पादक किसान होंगे, जिससे किसानों की भागीदारी और लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है.
गन्ना उद्योग विभाग ने दोनों चीनी मिलों के लिए क्षेत्र निर्धारण करते हुए अधिसूचना जारी कर दी है. जानकारी के अनुसार, रैयाम और सकरी चीनी मिलों के लिए कुल 2401 गांव आरक्षित किए गए हैं.
रैयाम चीनी मिल
मधुबनी: 438 गांव
दरभंगा: 580 गांव
सकरी चीनी मिल
मधुबनी: 686 गांव
दरभंगा: 697 गांव
इन क्षेत्रों के किसानों को इन मिलों से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा, जिससे गन्ना उत्पादन और बिक्री दोनों में सुधार की उम्मीद है.
सहकारिता विभाग ने किसान सदस्यों के चयन के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं. सामान्य किसान के पास कम से कम 100 डिसमिल जमीन में गन्ना उत्पादन होना चाहिए या उत्पादन की इच्छा होनी चाहिए. अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और महिला किसानों के लिए यह सीमा घटाकर 50 डिसमिल रखी गई है. हर आवेदक का कृषि विभाग के DBT पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा. सदस्य बनने के लिए प्रवेश शुल्क 500 रुपये रखे गए हैं और एक हिस्से का मूल्य 1000 रुपये निर्धारित है.
यह व्यवस्था छोटे और सीमांत किसानों को भी सहकारिता मॉडल से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार की गई है.
सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जाए और जल्द से जल्द सहकारी समितियों का रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल गन्ना किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी.
किसानों को जोड़ने के लिए विभाग ने एक खास डिजिटल व्यवस्था भी तैयार की है. सहकारी समितियों की सदस्यता के लिए विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया गया है जिसे जल्द ही इसे लॉन्च किया जाएगा. इसके जरिए किसान आवेदन कर सकेंगे. साथ ही, समिति गठन और कागजी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दो सदस्यीय संगठनकर्ता समिति का भी गठन किया गया है.
अगर यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो इसका सीधा फायदा गन्ना किसानों को मिलेगा. फसल की स्थानीय स्तर पर खरीद की सुविधा बढ़ेगी और बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी. बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
कुल मिलाकर, रैयाम और सकरी में चीनी मिलों की स्थापना बिहार के गन्ना उद्योग के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है.