बिहार में दाखिल-खारिज के नियम में बड़ा बदलाव, सरकारी जमीन के फर्जी दावों पर लगेगी रोक

बिहार में दाखिल-खारिज के नियम में बड़ा बदलाव, सरकारी जमीन के फर्जी दावों पर लगेगी रोक

बिहार सरकार ने दाखिल-खारिज प्रक्रिया को सख्त करते हुए सरकारी जमीन के रिकॉर्ड से मिलान अनिवार्य कर दिया है. साथ ही जमीन ट्रांसफर के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है.

Offline Land Revenue ReceiptOffline Land Revenue Receipt
क‍िसान तक
  • Patna,
  • Jun 22, 2026,
  • Updated Jun 22, 2026, 12:01 PM IST

बिहार सरकार ने दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलाधिकारियों (DM) और अंचल अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. अब दाखिल-खारिज के हर मामले में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड से मिलान करना जरूरी होगा. यानी किसी भी जमीन का नामांतरण करने से पहले यह जांची जाएगी कि वह सरकारी जमीन तो नहीं है.

इस कदम का मकसद सरकारी जमीन पर गलत जमाबंदी और फर्जी दावों को रोकना है. इसके लिए बिहार भूमि पोर्टल पर उपलब्ध सरकारी जमीन की सूची से मिलान करने के बाद ही आवेदन को मंजूरी दी जाएगी. सरकार ने जमीन ट्रांसफर की प्रक्रिया को भी आसान बना दिया है, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके.

दाखिल खारिज का नया नियम

नए नियमों के अनुसार अब जिलाधिकारी (DM) 10 एकड़ तक सरकारी या गैरमजरूआ आम जमीन का मुफ्त हस्तांतरण कर सकेंगे. 10 से 20 एकड़ तक जमीन के ट्रांसफर का अधिकार प्रमंडलीय आयुक्त को दिया गया है. 20 एकड़ से अधिक जमीन के हस्तांतरण के लिए कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी.

सरकार का कहना है कि इन बदलावों से विकास योजनाओं को तेजी मिलेगी और जमीन से जुड़े कामों में पारदर्शिता आएगी. यह बदलाव 2014 में बने पुराने नियमों में संशोधन कर किया गया है, ताकि जमीन से जुड़े मामलों को आसान, तेज और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा सके.

सरकार की सख्त चेतावनी

विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने दाखिल-खारिज (भूमि म्यूटेशन) के लंबित मामलों को जल्द निपटाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने आदेश दिया है कि राज्यभर में लंबित करीब 3.10 लाख आवेदनों को अधिकतम 15 दिनों के भीतर निपटाया जाए.

सरकार का कहना है कि दाखिल-खारिज प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाना उसकी प्राथमिकता है. इसके लिए डेली मॉनिटरिंग भी की जाएगी. विभाग ने चेतावनी दी है कि 15 दिनों बाद फिर से समीक्षा की जाएगी. अगर लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी. कुल मिलाकर, सरकार का फोकस साफ है कि लोगों को बिना परेशान किए जमीन से जुड़े काम जल्दी निपटाए जाएं.

(शशि भूषण की रिपोर्ट)

MORE NEWS

Read more!