Farmer ID: बिहार में आधा करोड़ किसानों की बनी फार्मर आईडी, 30 जून तक आप भी करा लें ये काम

Farmer ID: बिहार में आधा करोड़ किसानों की बनी फार्मर आईडी, 30 जून तक आप भी करा लें ये काम

बिहार सरकार ने डिजिटल कृषि के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसमें अब तक 50 लाख से अधिक किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है. इससे किसानों को डिजिटल पहचान मिलेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच सकेगा. फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान का दूसरा चरण 12 मई से 30 जून तक चल रहा है.

Agri Minister vijay kumar sinhaAgri Minister vijay kumar sinha
क‍िसान तक
  • Patna,
  • Jun 03, 2026,
  • Updated Jun 03, 2026, 11:03 AM IST

बिहार में खेती से जुड़ा एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ है. राज्य सरकार ने बताया है कि अब तक 50 लाख से ज्यादा किसानों की “फार्मर आईडी” बन चुकी है. इसका मतलब है कि अब किसानों को एक डिजिटल पहचान मिल रही है, जैसे हर व्यक्ति के पास आधार कार्ड होता है. इस पहचान से सरकार को किसानों तक योजनाएं पहुंचाने में आसानी होगी और किसानों को भी मदद जल्दी मिलेगी.

यह काम बिहार सरकार की एक बड़ी योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य खेती को आधुनिक और आसान बनाना है. सरकार चाहती है कि हर किसान तक सही समय पर सही मदद पहुंचे.

किसानों के लिए आसान योजनाएं

इस नई व्यवस्था के बाद किसानों को खाद, बीज, फसल सहायता और कृषि ऋण जैसी सुविधाएं सीधे उनके बैंक खाते में मिल सकेंगी. पहले कई बार किसानों को इन योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत होती थी या उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब डिजिटल सिस्टम से यह काम जल्दी और साफ तरीके से होगा.

सरकार का कहना है कि इससे बीच में किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरा सिस्टम पारदर्शी होगा. इसका मतलब है कि हर चीज साफ और ईमानदारी से होगी.

अभियान का दूसरा चरण जारी

इस योजना का दूसरा चरण 12 मई से शुरू हुआ है और यह 30 जून तक चलेगा. इस दौरान और भी किसानों को इस डिजिटल सिस्टम से जोड़ा जाएगा. इससे पहले पहले चरण में लगभग 47 लाख 85 हजार किसानों का पंजीकरण पूरा किया गया था. अब सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस योजना से जोड़ा जाए.

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस अभियान की शुरुआत की थी और उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी.

जमीन और रिकॉर्ड का डिजिटल सिस्टम

इस योजना का एक और बड़ा फायदा यह है कि किसानों की जमीन और खेती से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड अब डिजिटल हो जाएगा. राज्य में लाखों जमीन के रिकॉर्ड हैं और अब उन्हें कंप्यूटर सिस्टम में सुरक्षित रखा जा रहा है. इससे जमीन से जुड़े झगड़े कम हो सकते हैं और रिकॉर्ड भी आसानी से अपडेट हो जाएगा.

अगर किसी किसान को अपनी जमीन का रिकॉर्ड बदलवाना या सुधार करवाना हो, तो उसे बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. यह काम अब आसान और तेज हो जाएगा.

किसानों के लिए और भी फायदे

सरकार का मानना है कि इस डिजिटल सिस्टम से किसानों को खेती से जुड़ी सही जानकारी समय पर मिल सकेगी. जैसे कौन सी फसल कब बोनी है, कौन सा बीज अच्छा है और सरकारी मदद कब मिलेगी. यह सारी जानकारी किसानों तक आसानी से पहुँचाई जा सकेगी.

इसके अलावा सरकार यह भी देख सकेगी कि कौन-सी योजना कितने किसानों तक पहुँच रही है और कहाँ सुधार की जरूरत है. इससे पूरे सिस्टम की निगरानी बेहतर होगी.

खेती में तकनीक का नया कदम

बिहार सरकार इस पूरी योजना को खेती में तकनीक लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मान रही है. इससे गांवों में रहने वाले किसानों को भी आधुनिक सुविधाएँ मिलेंगी और उनका काम आसान होगा.

सरकार का कहना है कि जब पूरा डिजिटल सिस्टम तैयार हो जाएगा, तो किसानों की जिंदगी और भी आसान हो जाएगी. उन्हें कम परेशानी होगी और सरकारी मदद तेजी से मिलेगी.

कुल मिलाकर, बिहार में शुरू हुई यह डिजिटल कृषि योजना किसानों के लिए एक नई शुरुआत है. इससे न केवल उनकी पहचान डिजिटल होगी, बल्कि उन्हें योजनाओं का लाभ भी जल्दी और सीधे मिलेगा. यह कदम खेती को आधुनिक बनाने और किसानों की जिंदगी को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है. (रोहित कुमार सिंह की रिपोर्ट)

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