
बिहार का मखाना अब तेजी से वैश्विक स्तर पर सुपर फूड के रूप में पहचान बना रहा है. इसे देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार मखाना विकास को लेकर लगातार प्रयास कर रही हैं. इसी कड़ी में कृषि विभाग की ओर से मखाना की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सरकारी सब्सिडी का अवसर दिया जा रहा है. सरकारी सब्सिडी का लाभ लेने के लिए किसानों को 15 जनवरी तक बिहार कृषि ऐप या उद्यान निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा. इस योजना में विशेष रूप से नए मखाना किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी.
मखाना क्षेत्र विस्तार (खेत प्रणाली) योजना के तहत वही किसान सब्सिडी के लिए अप्लाई कर सकते हैं, जो विभागीय पोर्टल डीबीटी पर रजिस्टर्ड हैं. मखाना की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर इकाई लागत 0.97 लाख रुपये तय की गई है. इसमें बीज, अन्य इनपुट और हार्वेस्टिंग तक की पूरी लागत शामिल है.
योजना के पहले साल में किसानों को 36,375 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सब्सिडी दी जाएगी. बीज की राशि बीज प्राप्त होने के बाद संबंधित आपूर्तिकर्ता को दी जाएगी, जबकि शेष सब्सिडी राशि पौध रोपण के बाद सीधे किसानों के खाते में भेजी जाएगी. एक किसान न्यूनतम 0.25 एकड़ (0.1 हेक्टेयर) और अधिकतम 5 एकड़ (2 हेक्टेयर) तक इस योजना का लाभ ले सकता है.
इसके अलावा मखाना बीज उत्पादन योजना के तहत मखाना क्षेत्र में कार्यरत संस्थानों के माध्यम से उन्नत प्रभेद स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 के बीज का उत्पादन कराया जाएगा. मखाना बीज वितरण योजना के अंतर्गत अनुशंसित प्रभेद के बीज पर अधिकतम 225 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अनुदान दिया जाएगा. यदि बीज का मूल्य इससे अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि किसानों को स्वयं वहन करनी होगी.
यह योजना राज्य के 16 जिलों कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चम्पारण और मुजफ्फरपुर में लागू की गई है. सरकार की इस पहल से बिहार में मखाना की खेती के क्षेत्र का विस्तार होगा. साथ ही उन्नत बीज, आधुनिक उपकरण और तकनीकी सहयोग मिलने से न केवल मखाना उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है.
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