Chhatisgarh News: कोरिया में 'आवा पानी झोंकी' आंदोलन बना वरदान, खेतों में बढ़ा अंडरग्राउंड वाटर लेवल

Chhatisgarh News: कोरिया में 'आवा पानी झोंकी' आंदोलन बना वरदान, खेतों में बढ़ा अंडरग्राउंड वाटर लेवल

जल संकट के बीच कोरिया जिले में किसानों और ग्रामीणों की भागीदारी से एक नई पहल सामने आई है. खेतों की 5% जमीन पर बनाए जा रहे रिचार्ज तालाब और सोक पिट से बारिश का पानी जमीन में समाहित हो रहा है. इस मॉडल से भूजल स्तर बढ़ने के संकेत मिले हैं.

Korea Awa Pani Jhonki AbhiyanKorea Awa Pani Jhonki Abhiyan
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 05, 2026,
  • Updated Mar 05, 2026, 6:36 PM IST

जल संकट और घटते भूजल स्तर की चुनौती के बीच छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में किसानों की भागीदारी से जल संरक्षण का एक अनूठा मॉडल सामने आया है. ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा छोटे रिचार्ज तालाब और सोक पिट बनाने के लिए स्वेच्छा से दे रहे हैं, ताकि बारिश के पानी को खेतों में ही रोककर भूजल पुनर्भरण को बढ़ाया जा सके. जिले में अब तक 1,260 से अधिक किसान इस मॉडल को अपना चुके हैं और 2,000 से ज्यादा सोक पिट बनाए जा चुके हैं.

‘आवा पानी झोंकी’ आंदोलन के तहत किसानों ने अपनी खेती की जमीन के एक हिस्से पर छोटे रिचार्ज तालाब और सीढ़ीनुमा गड्ढे तैयार किए हैं. इन संरचनाओं का उद्देश्य बारिश के पानी को खेतों के भीतर ही रोकना और उसे जमीन में समाहित कर भूजल स्तर को मजबूत करना है. पहले जो वर्षा जल बहकर निकल जाता था, अब वही पानी खेतों और मिट्टी के भीतर संग्रहित होकर दोबारा उपयोग के लिए उपलब्ध हो रहा है.

खेती और पर्यावरण पर दिख रहा सकारात्‍मक असर

इस पहल का असर खेती और पर्यावरण दोनों पर दिखाई देने लगा है. खेतों में नमी बनाए रखने में मदद मिली है, मिट्टी का कटाव कम हुआ है और सूखे के दौर में भी फसलों को पर्याप्त नमी मिल रही है. इसके साथ ही भूजल स्तर के पुनर्भरण की प्रक्रिया भी मजबूत हुई है. अभियान में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी अहम रही है.

महि‍लाएं ‘नीर नायिका’ के रूप में निभा रही भूमिका

गांवों में महिलाओं ने ‘नीर नायिका’ के रूप में नेतृत्व संभालते हुए घरों के पास सोक पिट निर्माण को बढ़ावा दिया और जल संरक्षण का संदेश फैलाया. वहीं युवाओं ने ‘जल दूत’ बनकर नालों की सफाई, खाइयों की मैपिंग और नुक्कड़ नाटकों व दीवार चित्रों के जरिए लोगों को अभियान से जोड़ा. सामूहिक श्रमदान से जिले में 440 से अधिक पारंपरिक तालाबों को भी पुनर्जीवित किया गया है.

सरकारी योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों ने भी इस पहल को अपनाया है. प्रधानमंत्री आवास योजना के 500 से अधिक लाभार्थियों ने अपने घरों के पास सोक पिट बनाकर जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया है. ग्राम सभाओं के प्रस्ताव और वैज्ञानिक योजना के आधार पर यह पहल धीरे-धीरे जन आंदोलन का रूप लेती गई.

तीन घंटे में बनाए 660 सोकपि‍ट

सामूहिक भागीदारी की एक मिसाल तब देखने को मिली जब ग्रामीणों ने मात्र तीन घंटे में 660 सोकपिट तैयार कर दिए. इस मॉडल का असर कई गांवों में साफ दिख रहा है. भूजल स्तर 3 से 4 मीटर तक बढ़ा है और 17 दूरस्थ आदिवासी बस्तियों में प्राकृतिक झरने फिर से सक्रिय हो गए हैं. खेतों में बेहतर नमी के कारण कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ है और रोजगार के अवसर बढ़ने से मौसमी पलायन में लगभग 25 प्रतिशत तक कमी आई है.

जिला प्रशासन ने भी इस अभियान को तकनीकी सहयोग दिया. माइक्रो वाटरशेड मैपिंग, हाइड्रोजियोलॉजिकल अध्ययन और वैज्ञानिक योजना के आधार पर जल संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिससे जल पुनर्भरण की प्रभावशीलता बढ़ी. जिला कलेक्टर ने कहा कि यह पहल केवल जल संरचनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के भविष्य को सुरक्षित करने, पलायन कम करने और गांवों में स्थायी जल स्रोत सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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