
राजस्थान सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम से होने वाले फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2026 के लिए फसलों का बीमा कराने की अपील की है. राज्य के 41 जिलों में 31 जुलाई 2026 तक फसलों का बीमा किया जाएगा. सरकारी नोटिफिकेशन के अनुसार, खरीफ सीजन में बाजरा, ज्वार, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, चंवला, उड़द, अरहर, सोयाबीन, तिल, धान, कपास और मूंगफली समेत 14 फसलों को बीमा दायरे में रखा गया है. इन फसलों के लिए बीमा इकाई क्षेत्र तहसील और पटवार मंडल निर्धारित किए गए हैं.
योजना के तहत लोन वाले, गैर लोन वाले और पात्र बंटाईदार किसान अपनी नोटिफाइड फसलों का बीमा करा सकेंगे. फसल बीमा पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा. लोन वाले किसान अगर योजना में शामिल नहीं होना चाहते हैं तो उन्हें खरीफ के लिए 24 जुलाई और रबी के लिए 24 दिसंबर तक संबंधित वित्तीय संस्था में घोषणा-पत्र जमा करना होगा. गैर-लोन वाले किसान खरीफ के लिए 31 जुलाई 2026 और रबी के लिए 31 दिसंबर 2026 तक बैंक, डाकघर, कॉमन सर्विस सेंटर, अधिकृत बीमा एजेंट या राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से बीमा करा सकेंगे.
योजना के तहत खरीफ फसलों के लिए बीमित राशि का अधिकतम 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और वार्षिक वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम किसानों को देना होगा. इससे अधिक प्रीमियम का भार केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी.
योजना में कम बारिश, सूखा, लंबी शुष्क अवधि, बाढ़, जलभराव, कीट और रोग, भूस्खलन, बिजली गिरने से प्राकृतिक आग, तूफान, ओलावृष्टि और चक्रवात से होने वाले नुकसान को कवर किया गया है. कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल को चक्रवात, चक्रवाती बारिश, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर अधिकतम 14 दिन तक व्यक्तिगत आधार पर बीमा सुरक्षा मिलेगी.
वहीं, खरीफ मौसम में कम बारिश या प्रतिकूल मौसम के कारण किसी अधिसूचित क्षेत्र में प्रमुख फसल के 75 प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्र में बुवाई नहीं हो पाती या बाधित या निष्फल बुवाई की स्थिति बनती है तो पात्र किसानों को बीमित राशि का 25 प्रतिशत तक मुआवजा मिल सकेगा. इसके लिए राज्य सरकार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिफिकेशन जारी करनी होगी.
फसल कटाई के बाद नुकसान होने पर किसान को घटना के 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल, हेल्पलाइन 14447, क्रॉप इंश्योरेंस ऐप या संबंधित बैंक या कृषि विभाग को सूचना देनी होगी. अगर तय समय में सूचना नहीं दी जा सके तो अधिकतम सात दिन के भीतर निर्धारित प्रपत्र के साथ बीमा कंपनी को पूरा विवरण देना होगा.
राज्य के 41 जिलों को आठ क्लस्टर में बांटकर एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को योजना लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है.
व्यापक फसल नुकसान के मामलों में केंद्र और राज्य सरकार से प्रीमियम सब्सिडी मिलने के बाद पात्र किसानों के क्लेम की राशि अधिकतम तीन हफ्ते में डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी. वहीं, कटाई के बाद हुए नुकसान के मामलों में संयुक्त समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद 15 दिन के भीतर भुगतान किया जाएगा.