महाराष्ट्र में सोलर कृषि फीडर योजना से 8 लाख किसानों को फायदा, क्षमता बढ़ाकर 10 हजार मेगावाट करने की तैयारी

महाराष्ट्र में सोलर कृषि फीडर योजना से 8 लाख किसानों को फायदा, क्षमता बढ़ाकर 10 हजार मेगावाट करने की तैयारी

महाराष्ट्र सरकार की सौर कृषि पहल तेजी से आगे बढ़ रही है. सोलर कृषि फीडर योजना से लाखों किसानों को राहत मिली है और सिंचाई के लिए दिन में बिजली मिल रही है. अब सरकार योजना का दायरा बढ़ाकर ज्यादा किसानों तक पहुंचाने और बैटरी स्टोरेज सिस्टम जोड़ने की तैयारी कर रही है. जानें सीएम देंवेंद्र फडणवीस ने क्‍या कहा...

CM Devendra FadanvisCM Devendra Fadanvis
क‍िसान तक
  • Noida,
  • Mar 10, 2026,
  • Updated Mar 10, 2026, 3:50 PM IST

महाराष्ट्र में किसानों को दिन के समय सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही सोलर कृषि फीडर योजना से अब तक लगभग 8 लाख किसान लाभान्वित हो चुके हैं. राज्य सरकार अब इस योजना की क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक दिन में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके. राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री सोलर कृषि फीडर योजना (मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0) के तहत 4,000 मेगावाट क्षमता वाले प्रोजेक्ट का काम पूरा कर लिया गया है. 

क्षमता को 10 हजार मेगावाट तक बढ़ाने की योजना

सरकार अब अगले चरण में इस क्षमता को और 10,000 मेगावाट तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है. उन्‍होंने कहा है कि इस पहल से राज्य के किसानों को दिन के समय भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिल रही है. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के विस्तार के बाद राज्य के करीब 75 प्रतिशत किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी.

कुछ इलाकाें में चुनौतियां बरकरार

सरकार का लक्ष्य अगले वर्ष तक इस सुविधा को लगभग सभी क्षेत्रों तक पहुंचाने का है. हालांकि, कुछ इलाकों में तकनीकी और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, जिन्हें दूर करने की कोशिश की जा रही है. फडणवीस ने किसानों की ओर से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया का भी जिक्र किया.

राज्‍य सरकार किसानों को दे रही सोलर पंप

उन्होंने बताया कि ‘मागेल त्याला सौर कृषि पंप योजना’ के तहत किसानों को सौर ऊर्जा से चलने वाले कृषि पंप भी दिए जा रहे हैं. इससे किसानों को सिंचाई के लिए पारंपरिक बिजली पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और खेती की लागत भी कम होती है. उन्होंने एक महिला किसान का उदाहरण देते हुए बताया कि सोलर पंप से दिन में सिंचाई करने के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली को बैटरी और कैपेसिटर के जरिए स्टोर कर लिया जाता है, जिसका उपयोग रात में घरेलू जरूरतों के लिए भी किया जा सकता है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशि‍श है कि किसानों को दिन में कम से कम 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाए, जबकि अभी कई जगहों पर औसतन करीब 8 घंटे बिजली मिल रही है. योजना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने इसे प्रमुख पहल के रूप में चिह्नित किया है. आने वाले चरण में बैटरी स्टोरेज सिस्टम पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि सौर ऊर्जा का बेहतर इस्‍तेमाल और बिजली ग्रिड के साथ उसका बेहतर समन्वय किया जा सके. (पीटीआई)

MORE NEWS

Read more!