
महाराष्ट्र सरकार की नई कृषि कर्ज माफी योजना से राज्य के करीब 35 से 40 लाख किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है. इस योजना पर सरकार को लगभग 27,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. यह जानकारी एक समिति की रिपोर्ट से सामने आई है, जो पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई. 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने एक रिपोर्ट में जानकारी दी.
यह समिति प्रवीण परदेशी की अध्यक्षता में बनाई गई थी. अक्टूबर 2025 में प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता बच्चू कडू ने कर्ज माफी की मांग को लेकर आंदोलन किया था, जिसके बाद सरकार ने इस समिति का गठन किया. समिति ने कर्ज माफी के साथ-साथ खेती को लंबे समय में मजबूत करने के उपायों पर भी सुझाव दिए हैं.
सरकार ने 2026-27 के बजट में जिस योजना की घोषणा की है, उसका नाम रखा गया है- ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर किसान ऋण माफी योजना’. इस योजना की मुख्य बातें इस प्रकार हैं-
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा है कि खरीफ सीजन शुरू होने से पहले यह योजना लागू कर दी जाएगी.
योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए सरकार ‘एग्री स्टैक’ (Agri Stack) का इस्तेमाल करेगी. यह एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है, जिससे किसानों की जानकारी, जमीन का रिकॉर्ड और कर्ज से जुड़ा डेटा एक जगह उपलब्ध रहेगा. इससे पात्र किसानों को लाभ देने में आसानी होगी.
समिति ने यह भी कहा है कि बार-बार कर्ज माफी की जरूरत न पड़े, इसके लिए लंबी अवधि के समाधान जरूरी हैं. इसके तहत सुझाव दिए गए हैं कि सामूहिक खेती (ग्रुप फार्मिंग) को बढ़ावा दिया जाए. बेमौसम बारिश, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिले.
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मदद मिलने में देरी के कारण किसान अक्सर साहूकारों से कर्ज लेने पर मजबूर हो जाते हैं, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं.
इस बीच अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है. संगठन के महासचिव डॉ. अजीत नवले ने कहा कि “पिछली कर्ज माफी योजनाओं में सख्त शर्तों के कारण कई किसान बाहर रह गए थे. अगर इस बार भी वही नियम लगाए गए, तो फिर वही स्थिति बनेगी. इसलिए रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए.”
शुरुआत में सरकार की योजना थी कि इस बार कर्ज माफी का लाभ सिर्फ उन्हीं किसानों को दिया जाए, जिन्हें पहले कभी फायदा नहीं मिला. लेकिन बाद में यह तय किया गया कि ऐसा करना राजनीतिक रूप से ठीक नहीं होगा, और योजना में बदलाव कर दिया गया. महाराष्ट्र में इससे पहले भी कर्ज माफी योजनाएं लागू हो चुकी हैं जिनमें महात्मा ज्योतिराव फुले शेतकरी कर्जमुक्ति योजना (MJPSKY) सबसे प्रमुख है. यह उद्धव ठाकरे सरकार के दौरान शुरू हुई योजना है जिसमें 32.27 लाख किसानों को लाभ मिला (पात्र किसानों का 99.53%).
छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सन्मान योजना (2017) जो कि देवेंद्र फडणवीस के पहले कार्यकाल में लागू हुई. इस योजना में 44.4 लाख किसानों को फायदा हुआ और 18,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बांटी गई.
पिछले दो साल में महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र को लगातार संकटों का सामना करना पड़ा है. बाढ़ और बेमौसम बारिश, फसलों के दामों में उतार-चढ़ाव, किसान संगठनों और विपक्ष का दबाव जैसे कारणों से सरकार ने एक बार फिर किसानों को राहत देने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है.