
हरियाणा के किसानों के लिए बिजली को लेकर बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. राज्य में ट्यूबवेल कनेक्शन पर किसानों को 10 पैसे प्रति यूनिट की रियायती दर पर बिजली मिलती रहेगी. हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने वर्ष 2026-27 के लिए टैरिफ आदेश जारी करते हुए इस व्यवस्था को बरकरार रखा है. बिजली उत्पादन और सप्लाई की लागत में बढ़ोतरी के बावजूद किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया है.
प्रति यूनिट लागत 7.35 रुपये से बढ़कर 7.48 रुपये हो गई है, लेकिन इस अंतर को सरकार सब्सिडी के जरिए वहन करेगी. इसी कारण राज्य सरकार ने इस साल सब्सिडी बढ़ाकर 7,870.32 करोड़ रुपये कर दी है, जो पिछले साल 6,781.71 करोड़ रुपये थी.
कृषि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की कुल लागत लगभग 7,993.61 करोड़ रुपये आंकी गई है. इसमें से केवल करीब 123.30 करोड़ रुपये ही किसानों से वसूले जाएंगे, जबकि बाकी पूरी राशि सरकार सब्सिडी के रूप में देगी. इससे किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली मिलती रहेगी और खेती की लागत नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी.
राज्य में कृषि क्षेत्र के लिए बिजली आवंटन भी बढ़ाया गया है. वर्ष 2026-27 में 10,686.64 मिलियन यूनिट बिजली कृषि के लिए तय की गई है, जो पिछले साल 9,304.27 मिलियन यूनिट थी. सरकार खेती में बिजली की बढ़ती जरूरत को ध्यान में रखते हुए सप्लाई बढ़ा रही है.
हरियाणा में कुल 83.79 लाख बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें करीब 7.15 लाख किसान ट्यूबवेल कनेक्शन से जुड़े हैं. आयोग के इस फैसले में सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इससे आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिली है और बिजली बिल में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं होगी. सरकार का यह कदम बढ़ती बिजली की लागत के बीच किसानों को बड़ी राहत देगा. सस्ती बिजली से खेतों में सिंचाई आसान होगी और किसानों को फायदा होगा.