
तमिलनाडु में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है. प्रमुख विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने 3 अगस्त को तंजावुर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. डीएमके ने कहा कि यह आंदोलन राज्य सरकार की किसान नीतियों और कावेरी जल विवाद सहित कई मुद्दों पर कथित विफलताओं के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है. पार्टी के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ TVK सरकार लगातार तमिलनाडु के किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है. उन्होंने दावा किया कि फसल कर्ज माफी योजना को लागू करने में गड़बड़ी हुई है और कर्नाटक की मेकेदातु प्रोजेक्ट के मामले में राज्य सरकार ने प्रभावी रुख नहीं अपनाया.
उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि परंपरा के अनुसार 12 जून को मेट्टूर बांध से सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि कावेरी जल विवाद जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाने से भी इनकार कर दिया.
टीवीके सरकार कर्नाटक के मुख्यमंत्री के साथ संभावित बैठक को लेकर भी केवल संकेत दे रही है, लेकिन कोई साफ पहल नहीं दिख रही है. DMK नेता ने आरोप लगाया कि टीवीके सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने में नाकाम रही है और लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे किसानों का भरोसा कमजोर हुआ है.
उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष एम. के. स्टालिन के नेतृत्व में 3 अगस्त को तंजावुर में विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि इस आंदोलन के जरिए किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी.
वहीं, कावेरी किसान संघ ने प्रस्तावित तमिलनाडु-कर्नाटक वार्ता को लेकर नई मांग उठाई है. संगठन के महासचिव पी. आर. पांडियन ने कहा कि अगर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कर्नाटक दौरे पर जाकर वहां की जल परियोजनाओं और बांधों की स्थिति का जायजा लेते हैं तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को भी कावेरी डेल्टा के प्रभावित जिलों का दौरा करना चाहिए. उन्होंने कहर है कि इससे कर्नाटक के मुख्यमंत्री सूखती कुरुवई धान की फसल और किसानों को हो रहे वास्तविक नुकसान को अपनी आंखों से देख सकेंगे. (पीटीआई)