
कल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की 97वीं बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खेती-किसानी को लेकर अपना नया विज़न सामने रखा. उन्होंने साफ कहा कि 'बीज से लेकर बाजार तक' हम एक ऐसा सिस्टम डेवलप कर रहे हैं, जिससे खेतों में बंपर पैदावार हो और उपभोक्ताओं तक बेहतरीन क्वालिटी का फूड पहुंच सके. इस पूरी प्रक्रिया में सरकार की सबसे बड़ी कोशिश यही है कि किसानों की जेब में अच्छा मुनाफा आए। उन्होंने कहा कि पूरी फूड सप्लाई चेन में जो भी कमियां हैं, हम उन्हें जल्द दूर करेंगे.इसके अलावा, महिलाओ की आमदनी बढ़ाने के लिए फूड प्रोसेसिंग के कामों में 'लखपति दीदी' और खेती के कामों में 'ड्रोन दीदी' की मदद ली जाएगी. उन्होंने बताया कि इन सभी कामों के लिए बाकी विभागों के साथ मिलकर एक पक्का रोडमैप तैयार किया जा रहा है,
प्रधानमंत्री के 'सप्तधारा' विजन से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि हमारा पूरा फोकस अब 'फूड प्रोसेसिंग' पर रहेगा, ताकि किसानों को उनकी फसल का ज्यादा से ज्यादा मुनाफा मिल सके.बल डिमांड और प्योर क्वालिटी का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम आने वाले समय में बिना केमिकल वाली खेती पर सबसे ज्यादा ज़ोर देंगे. इससे दुनिया भर में हमारे शुद्ध खाने की डिमांड भी बढ़ेगी और किसानों की कमाई में भी ज़बरदस्त इज़ाफ़ा होगा.
किसान तक की तरफ से कुछ देशों द्वारा भारत से एक्सपोर्ट किए गए सामान को वापस भेजने के सवाल पर चौहान ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया. उन्होंने माना कि ऐसे एक-दो मामले सामने आए हैं और सरकार बारीकी से देख रही है कि पैदावार से लेकर स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट में आखिर कहां कमी रह गई है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इन इक्का-दुक्का मामलों के बावजूद,आज हम बड़ी मात्रा में अपने कृषि उत्पादों का एक्सपोर्ट कर रहे हैं. समुद्री रास्तों के ज़रिए लीची, मखाना और मसालों जैसी ढेरों चीज़ें दुनिया भर में भेजी जा रही हैं. ग्लोबल डिमांड के हिसाब से हम अपने उत्पादों को और भी बेहतर बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. कमियों को दूर करके भारतीय फूड को एक 'ग्लोबल ब्रांड' बनाया जाएगा. इसके साथ ही, उन्होंने बिना केमिकल वाली नेचुरल खेती को बढ़ावा देने पर भी खास ज़ोर दिया, जिससे सेहत अच्छी रहे और हमारे देश की फ़ूड क्वालिटी की एक अलग और शानदार पहचान बने.
बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों और अफसरों को सीधा मैसेज दिया कि सिर्फ रिसर्च कर लेना ही काफी नहीं है. कामयाबी की असली कसौटी यह है कि किसानों की परेशानी का सही समय पर समाधान हो और फायदे उन तक जल्दी पहुंचें. उन्होंने कहा कि अब हमें बाजार की डिमांड और ग्राहकों की पसंद के हिसाब से रिसर्च करनी होगी. नई-नई तकनीकों और आइडियाज को सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि असल ज़िंदगी में ज़मीन पर उनका असर दिखना चाहिए। किसानों, वैज्ञानिकों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को आपस में बातचीत बढ़ानी होगी. अगर हम सब मिलकर मेहनत करें, तो देश की खेती और किसानों की किस्मत को पूरी तरह बदला जा सकता है.
कृषि मंत्री ने किसानों की हालत सुधारने के लिए 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' पर काफी ज़ोर दिया. इसका सीधा सा मतलब है कि किसान सिर्फ एक फसल उगाने पर निर्भर न रहें, बल्कि खेती के साथ-साथ गाय-भैंस पालना, मछली पालन, मुर्गी पालन और मधुमक्खी पालन जैसे काम भी एक साथ करें. इस तरीके से एक काम का वेस्ट दूसरे काम में इस्तेमाल हो जाता है, खेती की लागत घटती है और साल भर पैसे की आवक बनी रहती है. इसके अलावा, सही वक्त पर बढ़िया क्वालिटी के बीज मिलना, खाद का संतुलित इस्तेमाल और मिट्टी की सेहत सुधारना भी बहुत ज़रूरी है, ताकि छोटे किसानों को इसका सीधा फायदा मिल सके.
बैठक के आख़िर में ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने बताया कि विज्ञान ने हमारी खेती में कितना बड़ा बदलाव किया है. उनके मुताबिक, देश में अनाज की पैदावार करीब 19 मिलियन टन बढ़ गई है, साथ ही दूध, मछली और बागवानी में भी शानदार तरक्की हुई है. डॉ. जाट ने बताया कि हाल ही में फसलों की 386 नई किस्में जारी की गई हैं. इनमें से 94% किस्में ऐसी हैं जो मौसम की मार जैसे ज्यादा गर्मी या बारिश आसानी से झेल सकती हैं.इसके अलावा, सूअरों में होने वाली बीमारी अफ्रीकन स्वाइन फीवरका देसी टीका बनाकर एक बड़ी कामयाबी हासिल की गई है. उन्होंने यह भी बताया कि खेती के क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए 9,000 से ज्यादा संस्थानों को एक प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है.