
राजस्थान के जालोर जिले में किसानों ने लंबे समय से बनी पेयजल और सिंचाई संकट की समस्या के समाधान के लिए नर्मदा नहर का पानी बांडी नदी में छोड़ने की मांग की है. किसानों ने चेतावनी दी है अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन शुरू किया जाएगा. बांडी नदी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों और ग्रामीणों ने शुक्रवार को भीनमाल के उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें रखी गई हैं. इनमें नर्मदा नहर का पानी बांडी नदी में छोड़ना, सिणधरा बांध की ऊंचाई कम करना और क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था में तत्काल सुधार करना शामिल है.
समिति ने कहा कि कि वर्ष 2006 में सिणधरा बांध बनने के बाद बांडी नदी का प्राकृतिक बहाव प्रभावित हुआ, जिससे नदी के जलग्रहण क्षेत्र के करीब 120 गांव गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं. किसानों का आरोप है कि नदी में पानी का नियमित बहाव रुकने से भूजल स्तर लगातार नीचे चला गया है, जिसका असर खेती और पशुपालन पर भी पड़ रहा है.
समिति के संयोजक और किसान नेता श्रवण सिंह राठौड़ ने आरोप लगाया कि पिछले लगभग दो दशकों में सिणधरा बांध कई बार भर चुका है, लेकिन उसका पानी न तो सिंचाई के लिए उपयोग में लाया गया और न ही पेयजल आपूर्ति के लिए प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया गया. उन्होंने कहा कि इससे निचले इलाकों के गांवों में जल संकट और गहरा गया है.
किसानों ने राज्य सरकार से मांग की है कि मॉनसून के चार महीनों के दौरान भरूड़ी गांव के पास मौजूद पाइपलाइन के जरिए बिना शोधन किया गया नर्मदा नहर का पानी बांडी नदी में छोड़ा जाए. किसानों का कहना है कि इससे भूजल का पुनर्भरण होगा और सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा.
किसानों ने सिणधरा बांध की ऊंचाई 45 फीट से घटाकर 22 फीट करने और मॉनसून के दौरान नदी के निचले हिस्से तक नियंत्रित जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए नए गेट लगाने की भी मांग की है.
श्रवण सिंह राठौड़ ने कहा कि अगर राज्य सरकार किसानों की मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती है तो 29 जुलाई को किसानों की बैठक बुलाई जाएगी. इस बैठक में व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी. (पीटीआई)