
पंजाब में किसानों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर देखने को मिला. संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर संगरूर में जहां किसानों ने अपने हकों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया, वहीं अमृतसर में मिलावटी डेयरी उत्पादों के खिलाफ किसानों ने उग्र विरोध दर्ज कराया.
संगरूर में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में किसानों ने इकट्ठा होकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को कानूनी गारंटी देने, बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने और खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई.
भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के प्रदेश महासचिव जगतार सिंह कालाझाड़ ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान पूरे पंजाब में अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इससे किसानों और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है.
किसान नेताओं ने बताया कि प्रदेश में खाद संकट गंभीर होता जा रहा है और किसानों को समय पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध नहीं हो रहा. इससे खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है. इसके साथ ही किसानों ने सहकारी समितियों से मिलने वाले लोन की सीमा बढ़ाने और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड में पंजाब-हरियाणा की हिस्सेदारी बहाल करने की भी मांग की.
उन्होंने भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे देश के कृषि क्षेत्र को नुकसान हो सकता है.
दूसरी ओर अमृतसर में भारतीय किसान एकता सिद्धूपुर के नेतृत्व में किसानों ने नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया. इस दौरान किसानों ने प्रतीकात्मक रूप से सड़कों पर दूध बहाकर प्रशासन के खिलाफ अपना रोष जताया. किसानों का आरोप है कि शहर में खुलेआम नकली खोया, सिंथेटिक पनीर और मिलावटी मिठाइयां बेची जा रही हैं, लेकिन प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करने में नाकाम रहा है.
जिला प्रधान करमजीत सिंह नंगली ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमृतसर के कई इलाकों में बड़े स्तर पर नकली डेयरी उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.
किसानों ने कहा कि इस तरह के सस्ते और मिलावटी उत्पादों की बिक्री से एक ओर उपभोक्ताओं की सेहत पर खतरा बढ़ रहा है, वहीं असली दूध उत्पादकों और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है.
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य दूध को बर्बाद करना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना है. उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. साथ ही उन्होंने बताया कि 1 जून से 6 जून तक सिख समुदाय के संवेदनशील दिनों को ध्यान में रखते हुए विरोध सीमित रखा गया है, लेकिन उसके बाद व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा सकती है.
संगरूर और अमृतसर में हुए इन प्रदर्शनों ने सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है. एक ओर किसान अपनी फसलों के उचित दाम और खेती से जुड़े संसाधनों की उपलब्धता की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर खाद्य सुरक्षा और मिलावट के मुद्दे पर भी आवाज बुलंद हो रही है. अब देखना होगा कि सरकार इन प्रमुख मांगों और समस्याओं पर क्या कदम उठाती है, क्योंकि दोनों ही मुद्दे सीधे किसानों और आम जनता से जुड़े हुए हैं.(कुलवीर सिंह और अमित शर्मा की रिपोर्ट)