संभाजीनगर में किसान कर्जमाफी पर विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन, कई मांगों को लेकर किया 'रास्ता रोको आंदोलन'

संभाजीनगर में किसान कर्जमाफी पर विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन, कई मांगों को लेकर किया 'रास्ता रोको आंदोलन'

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में किसानों की कर्जमाफी को लेकर विपक्ष ने बड़ा आंदोलन किया. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और महाविकास आघाड़ी के नेताओं ने किसानों के समर्थन में ‘रास्ता रोको’ आंदोलन कर सरकार से राहत की मांग की.

किसान कर्जमाफी पर विपक्ष का बड़ा प्रदर्शनकिसान कर्जमाफी पर विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन
क‍िसान तक
  • Sambhaji nagar,
  • Jun 29, 2026,
  • Updated Jun 29, 2026, 6:35 PM IST

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में किसानों की कर्जमाफी, फसलों के उचित दाम और कृषि संकट को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) ने महाविकास आघाड़ी के बैनर तले बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया. शहर के कैंब्रिज चौक पर आयोजित 'रास्ता रोको' आंदोलन में सांसद सुप्रिया सुले, प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे, विधायक रोहित पवार, सांसद निलेश लंके, बजरंग सोनावणे सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए. आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बंदोबस्त किया.

किसानों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप

आंदोलन के दौरान नेताओं ने राज्य और केंद्र सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया. प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने कहा कि राज्य का किसान आज आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन सरकार उसकी आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि महाविकास आघाड़ी किसानों के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी और यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो राज्यभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

‘किसानों की आवाज दबा रही सरकार’

शशिकांत शिंदे ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश के केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री का नाम भी किसानों की लाभार्थी सूची में शामिल होता है, तो यह सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक नहीं पहुंच रहा है.

वहीं, सांसद सुप्रिया सुले ने सरकार पर विपक्ष से डरने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जब भी विपक्ष किसानों और जनता के मुद्दों को लेकर आंदोलन करता है, सरकार जवाब देने के बजाय भारी पुलिस बल तैनात कर देती है. उनके मुताबिक सरकार जनता के सवालों से बच रही है और लोकतांत्रिक आंदोलनों को पुलिस के जरिए दबाने की कोशिश कर रही है.

किसानों की आवाज बनी महाविकास आघाड़ी

इसी दौरान अहमदनगर के सांसद निलेश लंके ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि आज किसानों को उनकी फसलों का उचित बाजार भाव नहीं मिल रहा है, जिसके कारण वे आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं और कई किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि किसानों की आवाज बुलंद करने के लिए यह आंदोलन किया जा रहा है. निलेश लंके ने सरकार की कृषि योजनाओं को पूरी तरह विफल बताते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रहा है. उनका आरोप था कि यदि सरकार सौ किसानों के लिए कोई योजना बनाती है, तो उसका फायदा मुश्किल से दो किसानों तक ही पहुंच पाता है. ऐसे में सरकार की कर्जमाफी और राहत योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई हैं.

किसान कर्जमाफी और राहत पैकेज की मांग 

उन्होंने सरकार के 36,500 करोड़ की कर्जमाफी और 55 से 56 लाख किसानों को लाभ मिलने के दावे को भी खारिज किया. लंके ने कहा कि सरकार सिर्फ आंकड़ों के सहारे अपनी उपलब्धियां गिना रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि पात्र किसानों तक कोई राहत नहीं पहुंची है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को भ्रमित कर रही है और कागजी दावों के जरिए अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है. वहीं, विधायक रोहित पवार ने भी सरकार पर किसानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि यदि किसानों को कर्जमाफी, उचित मूल्य और राहत नहीं मिली, तो महाविकास आघाड़ी का आंदोलन पूरे महाराष्ट्र में और व्यापक रूप लेगा. (इसरारुद्दीन चिश्ती की रिपोर्ट)

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