
बीते कई महीनों से महाराष्ट्र में प्याज उत्पादक किसान गहरे आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. राज्य की विभिन्न कृषि उपज मंडियों में प्याज के दाम तेजी से गिरकर 300 रुपये से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं, जिससे किसानों की लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है. मौजूदा हालात में जहां प्याज की उत्पादन लागत 1,500 रुपये से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बताई जा रही है, वहीं बाजार में मिल रहे दाम इससे काफी कम हैं. ऐसे में किसान कटाई और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं. कई जगहों पर मजबूरी में किसान औने-पौने दाम पर बिक्री कर रहे हैं, जबकि कुछ इलाकों में विरोध स्वरूप प्याज फेंकने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं.
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को ज्ञापन भेजकर राज्य में तुरंत बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) लागू करने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि मौजूदा स्थिति डिस्ट्रेस सेल की है और ऐसे में सरकारी हस्तक्षेप जरूरी हो गया है.
संगठन की ओर से सरकार के सामने कई अहम सुझाव रखे गए हैं. इसमें केंद्र को प्रस्ताव भेजकर MIS लागू करना, योजना को जिला ही नहीं बल्कि तालुका स्तर तक विस्तार देना, हर प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्र में सरकारी खरीद केंद्र खोलना और उत्पादन लागत के आधार पर न्यूनतम खरीद मूल्य तय करना शामिल है. इसके अलावा किसानों को सीधे राहत देने के लिए मूल्य अंतर भुगतान PDP प्रणाली लागू करने की भी मांग की गई है.
भारत दिघोले ने सरकार से सवाल किया है कि जब केंद्र की योजना उपलब्ध है और कीमतें लागत से नीचे जा चुकी हैं तो अब तक राज्य सरकार ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया. उन्होंने कहा कि देरी से किसानों की स्थिति और खराब हो सकती है.
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो राज्यभर में बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा. संगठन ने सरकार से अपील की है कि हालात की गंभीरता को देखते हुए तुरंत निर्णय लेकर किसानों को राहत पहुंचाई जाए.